August 11, 2026

विशेष रिपोर्ट: एक दिग्गज के दबाव में उत्तराखंड भाजपा? कार्यसमिति सदस्यों की सूची में फेरबदल के बाद अंदरूनी कलह तेज!

0
Tension in Uttarakhand BJP
  • सियासी विश्लेषक बोले– ‘डूबता हुआ तारा है पार्टी’

देहरादून। भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों, विशेष आमंत्रित एवं स्थायी आमंत्रित (पदेन) सदस्यों की सूची जारी होने के बाद — उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर सांगठनिक सूचियों और प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों के नामों को लेकर खींचतान अब पूरी तरह सतह पर आ चुकी है। चर्चा है कि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष द्वारा जारी की गई नई कार्यसमिति सदस्यों की सूची में अंतिम समय पर किए गए बड़े फेरबदल ने पार्टी के अंदरूनी गलियारों में भारी असंतोष पैदा कर दिया है। सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, यह पूरा बदलाव उत्तराखंड के ​ही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के भारी दबाव के चलते किया गया है।

अंतिम समय में बदला गया फैसला
चर्चा है कि प्रदेश अध्यक्ष द्वारा तैयार की गई शुरुआती सूची में कई नए और जनाधार वाले चेहरों को जगह दी जानी थी। लेकिन जैसे ही सूची अंतिम रूप लेने वाली थी, पार्टी के पुराने नेता ने अपने करीबियों को एडजस्ट करने के लिए हाईकमान और प्रदेश संगठन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार इसी दबाव के आगे झुकते हुए संगठन को ऐन वक्त पर कार्यसमिति सदस्यों के नामों में भारी फेरबदल करना पड़ा।

हार के डर’ के बीच अपने करीबियों को बचाने की होड़…
पार्टी से जुड़े लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि जिस नेता के इशारे पर यह बदलाव हुए हैं, वह खुद अपनी जमीनी पकड़ काफी हद तक खो चुका है, यहां तक कि उसके क्षेत्र की जनता ही उसके विरोध में कई बार मुखर भी हो चुकी है। क्षेत्र में इन चर्चाओं का भी बाजार गर्म है कि आगामी चुनाव में संबंधित नेता की स्थिति बेहद नाजुक है और उनकी हार तय मानी जा रही है। यहां तक की उनकी उम्र के आसपास के पार्टी से जुड़े रहे कई लोग तक उनके इस बार हराने की बात कर चुके हैं। इसके बावजूद, पुराने रसूख के बल पर फैसले प्रभावित करने की उनकी जिद ने समर्पित कार्यकर्ताओं और निष्ठावान नेताओं में भारी आक्रोश भर दिया है।

उत्तराखंड विस चुनाव 2027: इस महीने बूथ जीतो अभियान करेगी भाजपा

रुद्रपुर में सियासी हलचल तेज: विधायक और पूर्व विधायक आमने-सामने

ऐसे में सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कई समर्पित नेता पार्टी को लेकर नाराज हो गए हैं। यहां तक की वे अपना नाम कार्यसमिति के सदस्य में न आने से नाराज होकर आगे कि रणनीति पर भी विचार कर रहे हैं। ये नेता भाविष्य में बागी होकर पार्टी को सीधे तौर पर बड़ा नुकसान भी दे सकते हैं। वहीं कुछ नेताओं ने तो नाम न छापने की शर्त पर यह तक बताया है कि उन्हें अब पार्टी पर विश्वास ही नहीं रहा। साथ ही इन नेताओं से जुड़े सूत्रों का यह तक कहना है कि पार्टी डेमेज कंट्रोल के तहत इन्हें शांत करने की कोशिश कर सकती है। लेकिन इनमें से कई नेता पार्टी के सामने तो खुद को संतुष्ट दिखाकर अंदरखाने पार्टी को अंतिम समय पर भयंकर चोट दे सकते हैं।

Election 2027: उत्तराखंड की कई बड़ी सीटों पर हार के कगार में भाजपा

ग्राउंड रिपोर्ट: वर्षों के शासन के बाद भी इस क्षेत्र में विकास ‘शून्य’, मूलभूत समस्याओं से त्रस्त जनता

राजनीतिक विशेषज्ञों का बड़ा दावा: “भाजपा अब डूबता हुआ तारा”
इस घटनाक्रम के बाद अब राजनीति के कई जानकारों और वरिष्ठ विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड भाजपा जिस दिशा में फैसले ले रही है, वह उसके पतन का कारण (संकेत) बन सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड में भाजपा अब एक ‘डूबता हुआ तारा’ साबित होती दिख रही है।

Uttarakhand Politics: आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच दौड़ से बाहर हुए 17 दल

वहीं कई विश्लेषकों का तो यहां तक मानना है कि यदि संगठन की यही स्थिति रही और फैसलों में यही हठधर्मिता चलती रही, तो आगामी 2027 के चुनावों में पार्टी पूरी तरह सत्ता से बाहर हो जाएगी। ऐसे में पूरी ताकत लगाकर यदि भाजपा बहुमत बना भी लेती है तो स्थिति यहां तक आ सकती है कि भाजपा को महज एक या दो सीटें ही विपक्ष से अधिक जीतने की संतुष्टी करनी पड़े। ऐसी परिस्थिति में यदि पार्टी किसी तरह एक-दो सीटें निकाल भी लेती है, तो भी वह इस स्थिति में नहीं होगी कि अपनी सरकार 5 साल तक बचा सके। विरोधी पार्टियां किसी भी समय सरकार गिराकर स्वयं सत्ता पर काबिज हो सकती हैं।

Uttarakhand Politics: भाजपा ने प्रदेश स्तरीय विभागों के संयोजक-सह संयोजकों की सूची जारी, पर…

उत्तराखंड की इस सीट की सियासी चौसर पर अदृश्य खिलाड़ियों की एंट्री!

Dehradun samachar: भाजपा के 22 प्रकोष्ठों में प्रदेश संयोजक और सह-संयोजकों की नियुक्ति

कार्यकर्ताओं का टूटा मनोबल, सत्ता परिवर्तन के संकेत…
बताया जाता है कि संगठन के इस फैसले से यह संदेश गया है कि पार्टी जनता के फीडबैक और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर कुछ पुराने नेताओं के दबाव में काम कर रही है। भाजपा से जुड़े सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि जिन लोगों का नाम काटा गया है उनमें से कई का मानना है कि एक ओर जहां पीएम मोदी युवाओं को जोड़ने की बात करते हैं, वहीं धामी सरकार के नेताओं के दबाव में उत्तराखंड में युवा नेताओं को पार्टी में स्थान देने से बचा जा रहा है। आम जनमानस में तक यह चर्चा अब आम होती जा रही है कि यदि भाजपा में आंतरिक सुधार नहीं हुआ, तो राज्य से पार्टी का जनाधार बुरी तरह से प्रभावित होगा।

Uttarakhand: भाजपा में दबाव का खेल शुरु, चुनाव से पहले ही परिवारवाद का चेहरा आया सामने

BJP Uttarakhand: भाजपा की आत्ममुग्धता न बन जाए उत्तराखंड में हार का कारण

जानकारों का मानना है कि कार्यकर्ताओं का गिरता मनोबल और दिग्गजों का गुटबाज़ी में उलझना इस बात की ओर साफ इशारा कर रहा है कि उत्तराखंड में इस बार राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। ऐसे में देखना होगा कि हाईकमान इस अंदरूनी असंतोष पर क्या कदम उठाता है और जिनको संगठन में आने से वंचित किया गया वे इसे किस रुप में लेते हैं या फिर यह अंदरूनी कलह पार्टी के अंत की शुरुआत साबित होगी।

#चुनावी चौसर: उत्तराखंड में पर्दे के पीछे का ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’: सर्वे को मोड़ने की रणनीति

Uttarakhand BJP Faces Rising Rift Amid Leadership Pressure

 

#PoliticalStorm #UttarakhandBJP #PartyUnderPressure #Mission2027 #InternalRift #PoliticalCrisis #BreakingPolitics #BJPLeadership #TurmoilInParty #PoliticalAnalysis #UttarakhandBJP #PoliticalCrisis

Uttarakhand BJP Crisis, BJP Under Pressure, Party Rift Uttarakhand, Political Giant Influence, Mission 2027, Committee Shuffle Fallout, Internal Conflict BJP, Leadership Clash BJP, Mission 2027 Challenge

 

 

 

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *