August 3, 2026

बिना चिकित्सीय परामर्श के फिश ऑयल कैप्सूल का सेवन दे सकता है बीमारियों को न्योता, जानें इसके सही फायदे और नुकसान

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नई दिल्ली ।
आधुनिक जीवनशैली और बदलती खानपान की आदतों के बीच शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए सप्लीमेंट्स का चलन तेजी से बढ़ा है। विशेषकर जिम जाने वाले युवाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच ओमेगा-3 युक्त फिश ऑयल कैप्सूल का उपयोग काफी लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना डॉक्टरी परामर्श और सही खुराक की जानकारी के इसका नियमित सेवन फायदे के बजाय शरीर को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

फिश ऑयल में मुख्य रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, विटामिन डी और कई आवश्यक तत्व पाए जाते हैं, जिन्हें हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से निर्मित नहीं कर पाता। संतुलित मात्रा में इसका सेवन करने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है और रक्त में हानिकारक वसा का स्तर कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, यह यकृत में जमा अतिरिक्त वसा को नियंत्रित करने और जोड़ों की अकड़न व सूजन से राहत दिलाने में भी मददगार साबित होता है।

दूसरी ओर, विशेषज्ञ इसके अत्यधिक या अनियंत्रित सेवन को लेकर आगाह करते हैं। आवश्यकता से अधिक खुराक लेने पर शरीर में ओमेगा-3 का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, अपच और पेट दर्द हो सकता है। इसके अलावा, जो लोग पहले से रक्त को पतला करने वाली दवाइयों का सेवन कर रहे हैं, उनके लिए बिना सलाह के इसे लेना घातक हो सकता है, क्योंकि इसमें मौजूद गुण रक्त के थक्के जमने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं।

स्वास्थ्य सलाहकारों के अनुसार, जिन लोगों की दैनिक खुराक में पहले से ही प्राकृतिक रूप से ये पोषक तत्व मौजूद हैं, उन्हें अतिरिक्त सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं होती। अत्यधिक मात्रा में सेवन से शरीर में अन्य आवश्यक विटामिनों की कमी होने का जोखिम भी बना रहता है। जिन व्यक्तियों को समुद्री खाद्य पदार्थों से एलर्जी की शिकायत है, उन्हें ऐसे कैप्सूल के प्रयोग से पूरी तरह बचना चाहिए।

मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सप्लीमेंट्स के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है। चिकित्सकों का सुझाव है कि किसी भी प्रकार के आहार पूरक को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लेना चाहिए और इसे हमेशा भोजन के बाद ही निर्धारित मात्रा में ग्रहण करना चाहिए।

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