समुद्र और आसमान दोनों मोर्चों पर सक्रिय हुआ चीन, दक्षिण चीन सागर में बढ़ी रणनीतिक हलचल..
नई दिल्ली । दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर सैन्य गतिविधियां तेज होने से क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है। चीन ने विवादित समुद्री क्षेत्र में अपनी नौसेना और वायुसेना की नियमित गश्त बढ़ाने की घोषणा की है। इस कदम को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दुनिया के कई हिस्सों में समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले से ही चर्चा का विषय बनी हुई है। चीन की इस कार्रवाई के बाद फिलीपींस सहित क्षेत्र के अन्य देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
चीनी सेना के दक्षिणी थिएटर कमांड ने बताया कि नौसेना और वायुसेना ने दक्षिण चीन सागर के विभिन्न हिस्सों में नियमित संयुक्त गश्त की है। सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य समुद्री सीमाओं, क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी सैन्य गतिविधियां नियमित सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं और वह अपने दावों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
चीन ने इस दौरान फिलीपींस पर भी आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि फिलीपींस बाहरी देशों के साथ मिलकर संयुक्त सैन्य गश्त और सहयोग बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता पैदा हो रही है। चीनी अधिकारियों के अनुसार, ऐसे कदम दक्षिण चीन सागर में शांति बनाए रखने के प्रयासों के विपरीत हैं और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, दक्षिण चीन सागर लंबे समय से कई देशों के बीच विवाद का केंद्र बना हुआ है। चीन लगभग पूरे समुद्री क्षेत्र पर अपना दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके विभिन्न हिस्सों पर अपने अधिकार का दावा करते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में समय-समय पर सैन्य गतिविधियां, गश्त और कूटनीतिक बयानबाजी तेज होती रहती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भी इस इलाके पर बनी रहती है।
इस विवाद की कानूनी पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के व्यापक दावों को कानूनी आधारहीन माना था। हालांकि चीन ने उस फैसले को स्वीकार नहीं किया और लगातार अपने दावे पर कायम रहा। इसके बाद से इस समुद्री क्षेत्र में कई बार दोनों पक्षों के जहाजों और विमानों के आमने-सामने आने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दुनिया के बड़े हिस्से का समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ने वाला कोई भी तनाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी पड़ सकता है।
चीन की ताजा सैन्य गश्त ने यह संकेत दिया है कि वह विवादित समुद्री क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने की रणनीति पर कायम है। वहीं, क्षेत्रीय देशों की गतिविधियों और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच दक्षिण चीन सागर एक बार फिर वैश्विक कूटनीति और सामरिक चर्चाओं का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में संबंधित देशों के बीच संवाद, सैन्य गतिविधियों और कूटनीतिक प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।
