शतक छोड़ टीम को चुना, ईशान किशन बोले व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं भारत की जीत सबसे बड़ी प्राथमिकता
हरारे में खेले गए मुकाबले में ईशान ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने अपनी पारी में 9 चौके और 2 छक्के लगाए और भारत को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी शानदार बल्लेबाजी की बदौलत टीम इंडिया ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट पर 219 रन बनाए। जवाब में जिम्बाब्वे की पूरी टीम 129 रन पर सिमट गई और भारत ने 90 रन की बड़ी जीत दर्ज करते हुए तीन मैचों की टी20 सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली।
मैच के बाद ईशान किशन ने कहा कि उनके पास थोड़ा धीमा खेलकर अपना शतक पूरा करने का मौका था लेकिन उन्होंने ऐसा करने के बारे में कभी नहीं सोचा। उनका लक्ष्य हर गेंद पर सकारात्मक क्रिकेट खेलना और टीम के स्कोर को अधिकतम स्तर तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि टीम की सफलता सबसे बड़ी प्राथमिकता है और अगर तेज बल्लेबाजी करते हुए विकेट भी गंवाना पड़े तो वह टीम के हित में स्वीकार्य है।
ईशान ने अपनी शानदार पारी का श्रेय तिलक वर्मा को भी दिया जिन्होंने केवल 29 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाकर भारत की रन गति को लगातार बनाए रखा। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 94 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की जिसने मुकाबले का रुख पूरी तरह भारत के पक्ष में मोड़ दिया। ईशान ने कहा कि तिलक ने क्रीज पर आते ही बिना समय गंवाए आक्रामक बल्लेबाजी शुरू कर दी जिससे उन्हें भी खुलकर खेलने का आत्मविश्वास मिला।
उन्होंने यह भी बताया कि हरारे की पिच उतनी आसान नहीं थी जितनी स्कोरबोर्ड देखकर लग रही थी। गेंद कभी उछाल ले रही थी तो कभी नीचे रह रही थी। ऐसे में दोनों बल्लेबाज लगातार एक दूसरे से बातचीत करते रहे और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बनाते रहे। यही समझदारी बड़ी साझेदारी और विशाल स्कोर की वजह बनी।
ईशान किशन ने मैच के दौरान स्टेडियम में मौजूद भारतीय प्रशंसकों का भी विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिम्बाब्वे में भी भारतीय टीम को घरेलू मैदान जैसा समर्थन मिला। बड़ी संख्या में पहुंचे दर्शकों ने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया और यही वजह रही कि पूरी टीम ने मुकाबले का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्थकों के साथ तस्वीरें खिंचवाना और उनसे मिलना हमेशा खास अनुभव होता है।
ईशान की यह पारी केवल रन बनाने तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने यह भी दिखाया कि टीम की सफलता को व्यक्तिगत उपलब्धियों से ऊपर रखने वाला खिलाड़ी ही बड़े मंच पर असली मैच विजेता बनता है।
