#कालाढूंगी में ‘कायाकल्प’ के विजन से गरमाई सियासत, युवाओं की पहली पसंद बनकर उभर रहे गुंजन तिवारी
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एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण को समेटती हुई संपूर्ण खबर…
कालाढूंगी (हल्द्वानी)। उत्तराखंड की राजनीति में इस समय पारंपरिक ढर्रे से हटकर नए विजन और युवा चेहरों को आगे लाने की मांग तेज हो गई है। इसी कड़ी में कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में एक नया सियासी विमर्श शुरू हो चुका है, जिसने क्षेत्र के स्थापित राजनीतिक दिग्गजों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस विमर्श के केंद्र में हैं- गुंजन तिवारी, जिन्हें अब क्षेत्र के युवाओं और प्रबुद्ध वर्ग का खुला समर्थन मिलता दिख रहा है।
पीएम सम्मानित व्यक्ति के बयान ने बदला माहौल
इस चर्चा को उस समय और अधिक बल मिला जब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित (पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 122वें एपिसोड में नाम लेना) क्षेत्र के प्रबुद्ध व्यक्ति जीवन जोशी ने गुंजन तिवारी के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखी।

जीवन जोशी ने कहा था कि यूं तो किसी नेता का विरोधी नहीं हूं लेकिन, मैं गुंजन तिवारी को कालाढूंगी के विकास के लिए एक ‘वरदान’ मानता हूं। उन्होंने दावा किया कि यदि गुंजन तिवारी जैसे दूरदर्शी जनप्रतिनिधि को आगे आने का मौका मिलता है, तो वे कालाढूंगी की पूरी तस्वीर (कायाकल्प) बदल देंगे। यह एक ऐसे व्यक्ति का बयान है, जिसे खुद पीएम मोदी से सराहना मिली, ऐसे में उनका ये बयान क्षेत्र की राजनीति में बेहद अहम और वजनदार माना जा रहा है।
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युवाओं की पहली पसंद क्यों बन रहे हैं गुंजन तिवारी?
यदि जमीनी स्तर पर युवाओं के मूड को टटोला जाए, तो साफ नजर आता है कि गुंजन तिवारी की सक्रियता ने स्थानीय युवाओं में एक नया भरोसा जगाया है। युवा वर्ग अब ऐसे नेतृत्व की तलाश में है जो न सिर्फ उनकी समस्याओं को समझे, बल्कि रोजगार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर एक स्पष्ट रोडमैप रखता हो। गुंजन तिवारी का बेबाक अंदाज और क्षेत्र के विकास को लेकर उनका विजनरी दृष्टिकोण ही उन्हें आज के युवाओं के बीच लोकप्रिय बना रहा है। युवाओं का मानना है कि पारंपरिक राजनीति के दौर में गुंजन तिवारी एक ताजी हवा के झोंके की तरह हैं।
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‘पुष्पा मेमोरियल’ के सेवा कार्यों

धरातल पर दिख रहा सामाजिक सरोकार: ‘पुष्पा मेमोरियल’ बना मददगार- राजनीति के जानकारों की मानें तो “गुंजन तिवारी की इस बढ़ती लोकप्रियता के पीछे केवल उनके राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि धरातल पर किए जा रहे सामाजिक कार्य हैं। ‘पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन’ के बैनर तले उनके द्वारा चलाया जा रहा ‘युद्ध, नशा विरुद्ध’ अभियान क्षेत्र के युवाओं को एक नई दिशा दे रहा है। इसके साथ ही, आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था और स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक साल का ब्याज मुक्त ऋण देना उनकी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। पलायन रोकने के लिए स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाले इस कदम ने कालाढूंगी के कई परिवारों को आर्थिक संबल दिया है, जिससे यह साफ होता है कि वे क्षेत्र के कायाकल्प को लेकर कितने गंभीर हैं।”
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ज्ञात हो गुंजन तिवारी अपनी स्वर्गवासी मां की याद में ‘पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन’ चलाते हैं, और वे इसके ट्रस्टी है। वे इस फाउंडेशन के माध्यम अपने पैसे से समाजसेवा का कार्य करते हैं।
ऐसे समझें सेवा कार्य…
# ‘युद्ध, नशा विरुद्ध’ अभियान से युवाओं को नई राह: गुंजन तिवारी केवल राजनीतिक विजन ही नहीं रखते, बल्कि ‘पुषा मेमोरियल’ के तहत ‘युद्ध, नशा विरुद्ध’ अभियान चलाकर क्षेत्र के युवाओं को नशे की गर्त से बाहर निकालने का जमीनी प्रयास कर रहे हैं। उनका यह अभियान कालाढूंगी के भविष्य को सुरक्षित करने में सबसे बड़ा मददगार साबित हो रहा है।
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# गरीब बच्चों की शिक्षा का जिम्मा (स्कॉलरशिप): क्षेत्र का कोई भी होनहार बच्चा पैसों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए ‘पुष्पा मेमोरियल’ के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद बच्चों को स्कॉलरशिप (छात्रवृत्ति) दी जा रही है। जीवन जोशी जैसे प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में किया जा रहा यह निवेश कालाढूंगी के ‘कायाकल्प’ की सबसे मजबूत नींव है।
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# ‘स्वरोजगार’ के लिए एक साल का ब्याज मुक्त ऋण (Loan): आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में कदम बढ़ाते हुए गुंजन तिवारी स्थानीय लोगों को खुद का रोजगार शुरू करने के लिए एक साल तक का ब्याज मुक्त ऋण (Interest-free Loan) उपलब्ध करा रहे हैं। बिना ब्याज के मिलने वाली इस आर्थिक मदद से क्षेत्र के छोटे व्यापारियों, महिलाओं और युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का संबल मिला है। साथ ही ये कार्य पलायन को रोकने मे भी सहायक सिद्ध हो रहा है।
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# चुनावी वादों से अलग ‘धरातल का सेवा भाव’: राजनीति के कई जानकारों का मानना है कि यदि इस पूरी स्थिति को पेनी नजर से देखें तो जहां अधिकांश नेता केवल चुनावों के समय वादे करते हैं, वहीं गुंजन तिवारी सामाजिक सरोकारों के जरिए पहले से ही धरातल पर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि उनकी इस जनहितैषी सोच के कारण वे आज कालाढूंगी के युवाओं और आम जनता की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।
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राजनीतिक विश्लेषकों का नजरिया: क्या यह बड़े बदलाव का संकेत है?
अगर पत्रकारिता के तीखे नजरिए से इस पूरे घटनाक्रम को देखें, तो कालाढूंगी की आंतरिक राजनीति में यह एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट है। विश्लेषकों का मानना है कि जीवन जोशी जैसे निष्पक्ष और सम्मानित चेहरे द्वारा गुंजन तिवारी का समर्थन करना कोई सामान्य बात नहीं है। यह दिखाता है कि क्षेत्र का साइलेंट वोटर और पढ़ा-लिखा युवा वर्ग अब केवल पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि उम्मीदवार की योग्यता और उसके विजन को देखकर अपनी राय बना रहा है।
तमाम बातों के बीच, गुंजन तिवारी को मिल रहा यह युवा समर्थन इस बात का साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में कालाढूंगी का सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। अब देखना यह होगा कि युवाओं का यह भरोसा आने वाले समय में क्या नया राजनीतिक समीकरण तैयार करता है।
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