Uttarakhand Girl Murder: दो दिनों से धारदार हथियार लेकर टहल रहा था आकाश, हत्यारोपी की पत्नी ने दी थी सूचना

देहरादून के दूल्हा बाजार में दिनदहाड़े गुंजन की हत्या करने का आरोपी आकाश दो दिनों से धारदार हथियार लेकर घूम रहा था। 31 जनवरी को ही आकाश की पत्नी ने इसकी जानकारी गुंजन के परिजनों को दी थी। खुद गुंजन के चचेरे भाई अंश ने इसकी जानकारी दी। यदि समय रहते इस बात को गंभीरता से लिया जाता तो शायद गुंजन की जान बच सकती थी।
सोमवार को शहर कोतवाली क्षेत्र के दूल्हा बाजार में आकाश ने गुंजन पर चापड़ से हमला कर दिया था जिससे गुंजन की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद व्यापारियों ने आक्रोश में बाजार बंद कर दिया था। जांच में सामने आया कि पूर्व में आकाश के परेशान करने पर गुंजन ने पुलिस चौकी में शिकायत की थी। वहां दोनों के बीच समझौता हो गया था।
इसके बाद वह लगातार गुंजन से संपर्क का प्रयास करता रहा। कई बार गुंजन को मारने की धमकी भी दे चुका था। 31 जनवरी को आकाश की पत्नी ने गुंजन के परिजनों से संपर्क किया था। गुंजन के भाई अंश ने बताया कि आरोपी आकाश की पत्नी ने फोन करके आगाह किया था कि वह धारदार हथियार लेकर घूम रहा है। पुलिस को दी गई तहरीर में भी गुंजन के भाई ने जिक्र किया है कि आकाश ने फिल्मी स्टाइल में धमकी दी थी। आरोप है कि आकाश ने दबाव बनाया था कि अगर गुंजन उससे शादी नहीं करेगी तो वह जान से मार देगा।
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एसएसपी अजय सिंह के निर्देश पर पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि टीम को जल्द से जल्द गहनता से जांच पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में हर पहलू की गंभीरता से पड़ताल की जाएगी। उसी आधार पर चार्जशीट फाइल की जाएगी।
सरकार से सवाल, जो जरूरी भी हैं:
क्या देवभूमि का शासन-प्रशासन बच्चियों की सुरक्षा में असमर्थ है?
अंकिता के बाद गुंजन की हत्या का क्या संदेश माना जाए? इनका दोषी कौन? वहीं जब ये बातें सामने आती हैं कि पुलिस ने समय रहते कार्य नहीं किया। तो यह संदेश इशारा साफतौर पर करता है कि या तो पुलिस सरकार के आदेशों की अनदेखी कर रही है, या कुछ धुंधला सा कुछ और ही है। ऐसे में जनता जवाब चाहती है कि आखिर इन हत्याओं का जवाबदेह कौन है?
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ऐसे में जो जवाब सामने आता है (पुलिस का समय रहते रिएक्ट न करना) वह है उत्तराखंड का गृह विभाग (पुलिस इसी विभाग के अंतर्गत आती है), अब ये विभाग किसके पास है? तो बहुत से अन्य सवाल उपजने शुरु हो जाते है। क्या गृह विभाग इसका जवाब देगा या ये केवल अपने पद और अपने पद का दिखावा मात्र बनाने के चलते हुआ। और बाद में केवल एक निर्देश जारी होगा कि पुलिस अपने कार्यों को सुधारे। लेकिन जो बच्ची चली गई उससे क्या केवल इन वाक्यों से वापस लाया जा सकता है या न्याय दिया जा सकता है।
कई जानकारों का तो यह भी मानना है कि जहां सरकार पलायन का रोना रोती रहती है, वहीं ऐसी स्थितियां भी भविष्य में लोगों के और अधिक पलायन का कारण बन सकतीं हैं।
