Uttarakhand future: ‘लोंगान फल’ का मीठा स्वाद आपको लीची भूला देगा
– देवभूमि के मैदानी क्षेत्रों में खेती के उपयुक्त

पंतनगर में लगे किसान मेले में कोलकाता की एक नर्सरी के स्टाॅल पर पहली बार लोंगान (ड्रैगन आई) के पौधों को लाया गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में सुगंध से भरपूर और बेहद मीठे इस फल के आगे लोग लीची का स्वाद भूल जाएंगे। मेले में इसके एक पौधे की कीमत दो हजार रूपये रखी गई है।
यहां बताया गया कि सैपिनदासी कुल के इस पौधे की लोंगान थाईलैंड प्रजाति है। इसे उनकी नर्सरी में ग्राफ्टिंग तकनीक से पौधे तैयार किए जा रहे हैं। सैपिनदासी कुल में ही लीची और रामभूटान भी आते हैं। इस कारण लोंगान की बहन लीची और भाई रामभूटान कहा जाता है। यह पूर्व में पाई जाने वाली आॅशफल की ही प्रजाति है। जिसे विकसित कर लोंगान के रूप में 30-35 ग्राम तक करने में सफलता मिली है। इस फल के अंदर की गुठली फल काटने पर ड्रैगन की आंख जैसी दिखाई देती है। तभी इस फल को ड्रैगन आई भी कहा जाता है।
लोंगान: ये है खासियत
लोंगान के फल में लीची की तरह खट्टापन बिल्कुल नहीं होता है। बल्कि यह बेहद सुगंधित और मीठा (स्वीटनेस 18-25 प्रतिशत) होता है। इसके फल का वजन 35-40 ग्राम तक पाया गया है। भारत में लीची का उत्पादन बहुतायत में होता है फिर भी उसका मूल्य 100-120 रूपये प्रति किग्रा. तक ही रहता है। जबकि लोंगान फल की कीमत 350-500 रूपये प्रति किग्रा. तक होती है। इस फल में विटामिन बी और सी, विशेष रूप से थायमिन (बी1) सहित इसमें पोटेशियम, तांबा, जस्ता, मैग्नीशियम, फास्फोरस और लोहा जैसे आवश्यक खनिज मौजूद होते हैं। संवाद
लोंगान: तराई में खेती लाभदायक है
थाईलैंड की इस प्रजाति के पौधे 40-48 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी पनप सकते हैं। जिससे इसकी खेती उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है। इसके पौधे से दो साल में ही व्यावसायिक उत्पादन लिया जा सकता है। जबकि लीची से पांच-सात और रामभूटान से आठ-दस साल में उत्पादन प्राप्त होता है। लोंगान के एक पौधे से दो साल में 15-20 किग्रा. और चार साल बाद 50-60 किग्रा. तक फलोत्पादन होता है।
