October 13, 2026

उत्तराखंड में दायित्वधारियों को चुनाव प्रभारी बनाने पर रार

0
Uttarakhand - politics (1)
  • कांग्रेस बोली-सरकारी धन का हो रहा दुरुपयोग

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति की है। इनमें एक दर्जन से अधिक ऐसे नेता भी शामिल हैं, जिन्हें सरकार में दायित्वधारी बनाया गया है। इन दायित्वधारियों को सरकार की ओर से गाड़ी और मानदेय जैसी सुविधाएं मिलती हैं। ऐसे में कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि सरकारी सुविधाएं लेने वाले ये नेता अब पार्टी संगठन के चुनावी कार्यक्रमों को कैसे आगे बढ़ाएंगे और इसे क्यों नहीं सरकारी धन के दुरुपयोग से जोड़ा जाना चाहिए। कांग्रेस ने इन दायित्वधारियों को पद से हटाने की मांग करते हुए सरकारी धन और राजनीतिक गतिविधियों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए हैं।

दायित्वधारियों को लेकर उठे सवाल
उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में लाने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी ने प्रदेश की सभी 70 विधानसभा सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति कर उन्हें संगठन के कामकाज और पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन, इन नियुक्तियों में शामिल सरकार के दायित्वधारियों को लेकर अब सियासी सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि सरकार से गाड़ी और मानदेय जैसी सुविधाएं लेने वाले ये नेता अब पार्टी संगठन के लिए भी काम करेंगे, तो सरकारी और संगठन की जिम्मेदारियों के बीच अंतर कैसे तय होगा?

यह सवाल चर्चा में…
भाजपा की ओर से विधानसभा प्रभारियों की जिम्मेदारी दिए जाने वालों में 18 ऐसे नाम शामिल हैं, जिन्हें राज्य सरकार ने दायित्वधारी मंत्री का दर्जा दिया है। इनमें जगत सिंह चौहान, रामचंद्र गौड़, ऋषि प्रसाद सती, जोत सिंह बिष्ट, बच्चन सिंह पवार, मधु भट्ट, अभिषेक शाही, भुवन विक्रम डबराल, अनुराधा वालिया, शोभाराम प्रजापति, नितिन गौतम, विशाल गुप्ता, जयपाल चौहान, श्यामवीर सैनी, विजय कपरवान, श्याम नारायण पांडे, सुभाष बगौली और दीपक मेहरा के नाम शामिल हैं। इन नेताओं को सरकार में दायित्व दिए जाने के बाद अब संगठन ने भी उन्हें विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल चर्चा में है कि सरकार की ओर से निर्धारित जिम्मेदारियों के साथ ये नेता पार्टी के चुनावी कार्यक्रमों के लिए किस तरह समय और संसाधनों का इस्तेमाल करेंगे।

भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान के अनुसार जिन पार्टी नेताओं को दर्जाधारी बनाया गया है, वह भी संगठन से ही जुड़े हुए हैं और उनका काम भी सरकार के बेहतर कामों को आगे बढ़ाना है। ऐसे में अब उन्हें यदि सरकार से हटकर संगठन भी कोई काम दे रहा है तो इसमें परेशानी क्या है?

ये भी पढ़ें: उत्तराखंड: भाजपा ने प्रदेश स्तरीय विस्तारक टोली बनाई, चुनाव 2027 की तैयारियां शुरु

कांग्रेस का सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल
भाजपा की इन नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाते हुए दायित्वधारियों को उनके पदों से हटाने की मांग की है। कांग्रेस के अनुसार जब इन नेताओं को सरकार की ओर से गाड़ी, मानदेय और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं, तो ऐसे में उनकी संगठनात्मक और चुनावी गतिविधियों को लेकर जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि सरकारी खजाने से सुविधाएं प्राप्त करने वाले नेताओं का इस्तेमाल यदि पार्टी संगठन के कार्यक्रमों और चुनावी तैयारियों में किया जाता है, तो क्या इसे सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए? पार्टी ने इसी आधार पर दायित्वधारियों को सरकारी पदों से हटाने की मांग की है।

काम में अंतर कितना स्पष्ट?
इस पूरे मामले में अहम सवाल यह है कि सरकार में दायित्वधारी के रूप में नियुक्त नेताओं की आधिकारिक जिम्मेदारियां क्या हैं और विधानसभा प्रभारी के तौर पर उन्हें कौन-कौन से काम सौंपे गए हैं? साथ ही सरकारी सुविधाओं का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा सकता है और पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों के लिए होने वाले खर्च की व्यवस्था कैसे होती है? यह भी महत्वपूर्ण है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट के अनुसार भाजपा राज्य में एक नई परंपरा डाल रही है और सरकारी धन का संगठन के कार्यों में भी उपयोग करवा रही है।  ऐसे में यदि इन दायित्वधारियो से संगठन का काम करवाना है तो इन्हें पद से हटाया जाए।

बहस: सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर
हालांकि केवल विधानसभा प्रभारी बनाए जाने से सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए सरकारी सुविधाओं के वास्तविक इस्तेमाल और संबंधित नियमों की पड़ताल जरूरी है। फिलहाल भाजपा की इन नियुक्तियों ने सरकार और संगठन की जिम्मेदारियों के बीच अंतर तथा सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। हालांकि यह बात भी साफ है कि दायित्व धारी बनने के बाद सरकार जो सुविधाएं और पैसा दर्जाधारी राज्य मंत्री को देती है उसका काम सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं और सरकारी कार्यों को आम जनता के लिए बेहतर रूप से करना है, या इसकी निगरानी करना है, ऐसे में यदि पार्टी संगठन के लिए सरकारी गाड़ी या सुविधाओं का उपयोग किया जाता है तो वह भी सही नहीं है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *