September 25, 2026

बदरीनाथ धाम में आयोजनों पर ज्योतिर्मठ की आपत्ति

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badrinatham
  • तेज ध्वनि और फूहड़ प्रस्तुतियों पर उठाए सवाल

बदरीनाथ धाम में परंपरा-विरुद्ध आयोजनों, तेज ध्वनि, सांस्कृतिक फूहड़ता और धार्मिक मर्यादा के कथित उल्लंघन पर गंभीर आपत्ति का मामला सामने आया है। ज्योतिर्मठ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बदरिकाश्रम क्षेत्र की अपनी विशिष्ट आध्यात्मिक परंपराएं और मर्यादाएं हैं, जिनका संरक्षण किया जाना आवश्यक है।

ज्योतिर्मठ के प्रभारी स्वामी प्रत्यक्चैतन्यमुकुन्दानन्द गिरि ने कहा कि पुराणों में बदरीनाथ धाम और बदरिकाश्रम के आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन मिलता है। भगवान नर-नारायण की तपस्थली होने के कारण इस क्षेत्र में शांति, संयम और साधना को विशेष महत्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी मान्यताओं वाले क्षेत्र में तेज ध्वनि वाले कार्यक्रम और शोर-शराबे वाले आयोजन धार्मिक वातावरण के अनुरूप नहीं हैं।

बयान में कहा गया कि हिमालयी संस्कृति अपनी गंभीरता और मर्यादा के लिए जानी जाती है। जिस क्षेत्र में ब्रह्मकमल जैसे संवेदनशील पुष्प को भी विशेष श्रद्धा और नियमों के साथ भगवान के चरणों में अर्पित किया जाता है, वहां ध्वनि और सांस्कृतिक प्रदूषण से जुड़े आयोजनों पर विचार किया जाना चाहिए।

ज्योतिर्मठ ने आरोप लगाया कि बदरीनाथ धाम में कपाट खुलने से पहले स्थानीय सैन्य अधिकारियों और आयोजकों की ओर से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसे धार्मिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए कहा गया कि कपाट बंद रहने की अवधि में धाम की पूजा व्यवस्था और मान्यताओं का विशेष महत्व रहता है। ऐसे समय में मानवीय गतिविधियों से संबंधित आयोजनों को लेकर धार्मिक पक्ष से गंभीर आपत्ति है।

हाल ही में अराइवल प्लाजा के समीप आयोजित एक उत्सव का उल्लेख करते हुए ज्योतिर्मठ ने कहा कि उत्तराखंड के व्यंजन, वेशभूषा और सेना के शौर्य का प्रदर्शन सकारात्मक पहलू हो सकता है, लेकिन तेज ध्वनि वाले यंत्र, अशोभनीय गीत और फूहड़ प्रस्तुतियां बदरीनाथ धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं हैं।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

ज्योतिर्मठ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले में प्रतिक्रिया देने और तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। बयान में कहा गया कि धार्मिक परंपराओं के उल्लंघन और मर्यादाहीन आयोजनों के लिए जिम्मेदार आयोजकों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की जानी चाहिए।

ज्योतिर्मठ ने बदरीनाथ धाम और अन्य तीर्थ क्षेत्रों में तेज ध्वनि, अशोभनीय प्रस्तुतियों तथा शोर-शराबे वाले आयोजनों पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही कहा कि तीर्थ क्षेत्रों में किसी भी नए निर्माण, योजना या बड़े आयोजन से पहले शंकराचार्य से परामर्श और मार्गदर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

ज्योतिर्मठ ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र के संचालन और विकास के नाम पर उसकी मूल शांति और आध्यात्मिक स्वरूप से समझौता नहीं किया जाना चाहिए। व्यवस्था संचालन का दायित्व मिलने का अर्थ धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं में बदलाव करना नहीं है।

गौरतलब है कि बदरीनाथ धाम में प्रदेश की गायिका प्रियंका मेहर के कार्यक्रम पर कांग्रेस समेत अन्य संगठन व दल भी उंगली उठा रहे हैं। यह एक राजनीतिक-सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है।

 

 

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