दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल
दिग्विजय सिंह की यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी है और लगभग 70 दिनों में अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचने का कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे दिन पिंगलेश्वर जोड़ नहारिया जोड़ सायराखेड़ी और देवनखेड़ी होते हुए ताजपुर जोड़ तक पहुंचने की योजना थी। इसके बाद भोजन और विश्राम के लिए रुकने तथा शाम को देवास जिले के सिंदूरिया गांव में पड़ाव डालने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को शिव धाम से राम धाम तक की यात्रा बताया। इस दौरान उन्होंने समर्थकों के साथ बम-बम भोले का उद्घोष किया जबकि समर्थकों ने जय सियाराम के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा में माता सीता का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यात्रा को लेकर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के निर्माण के समय वैसा उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाते हुए नजर आ रहा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें छोड़ दीजिए मैं उन्हें जानता भी नहीं। उनके इस जवाब के बाद यात्रा को लेकर चल रही बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई।
दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने यात्रा को धार्मिक आस्था और स्वाभिमान से जुड़ा अभियान बताया। उनके मुताबिक चढ़ावे की कथित चोरी और धर्म के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। यात्रा के जरिए इन्हीं मुद्दों को उठाकर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सोंधिया के अनुसार यात्रा में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए अब तक करीब तीन हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है जबकि अलग-अलग स्थानों पर हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई लेकिन बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने वोट चोरी और नोट चोरी के मुद्दे भी उठाए हैं। यात्रा के दौरान पर्चे बांटने और राष्ट्रपति के नाम रिपोर्ट पेश करने की बात भी कही गई है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना और न्याय की मांग करना है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में यात्रा से जुड़े संवाद की जिम्मेदारी अमृता राय को सौंपने की बात भी कही है।
दूसरी ओर उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने इस यात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन का ध्वज भगवा है लेकिन यात्रा में भगवा ध्वज दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने तिरंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश का मान सम्मान और अभिमान है। सांसद ने दिग्विजय सिंह को संत के बजाय राजनेता बताते हुए कांग्रेस के पुराने रुख और भगवान राम से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया। इस तरह यात्रा के धार्मिक उद्देश्य और उसके राजनीतिक मायनों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
