March 8, 2026

मप्रः इंदौर में दो साल की मासूम से दुष्कर्म करने वाले को 4 धाराओं में उम्रकैद

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– देश में पहली बार दुष्कर्मी को चार बार उम्रकैद, कोर्ट ने कहा- महिलाएं बाहर ही नहीं, घर में भी असुरक्षित

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दो साल की बच्ची को घर से उठाकर दुष्कर्म और उसकी हत्या की कोशिश करने वाले आरोपित को न्यायालय ने चार अलग-अलग धाराओं में चार बार उम्रकैद की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायालय पाक्सो) शिप्रा पटेल की कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। आरोपित दिनेश डाबर (38 वर्ष), निवासी धार को पाक्सो एक्ट की तीन धाराओं के साथ ही हत्या के प्रयास की धारा में अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जबरदस्ती संबंध बनाने की धारा में भी पांच साल की सजा सुनाई गई। दोषी पर कोर्ट ने 42,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

फैसले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि दोषी ने बालिका को घर से ले जाकर उसके साथ बलात्कार की घटना कारित की। उसे गंभीर चोंटे पहुंचाई। यह उसकी आपराधिक कुंठित मानसिकता को दर्शाता है। वर्तमान परिवेश में महिलाएं न केवल घर के बाहर बल्कि घर के अंदर भी असुरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में अभियुक्त को न्यूनतम दंडादेश दिया जाना न्यायोचित और विधिपूर्ण नहीं है ।

विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर एवं प्रीति अग्रवाल ने बताया कि घटना 13 अक्टूबर 2022 की है। बालिका के पिता ने थाना चंदननगर में सूचना दी कि वह एक निर्माणाधीन भवन में परिवार सहित रहता है वहां चौकीदारी करते हैं। रात में लगभग 2 बजे से उनकी दो साल की वर्षीय जो अपनी मां के पास सो रही थी, वह गायब हो गई है। उसने और उसकी पत्नी ने पुत्री की आसपास तलाश किया लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। मामले में पुलिस ने पिता की रिपोर्ट पर अज्ञात के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज कर तलाश शुरू की। 13 अक्टूबर को सुबह रेती मंडी रोड स्थित खम्बाती कंपाउंड के सामने डायल-100 के सिपाही अभिनव सेन को झाड़ियों के पास घायल अवस्था में वह बच्ची मिली। जिसकी पहचान उसके माता-पिता ने की। विवेचना में घटनास्थल के आसपास स्थित सीसीटीवी फुटेज की रिकार्डिंग जब्त की। सीसीटीवी फुटेज में घटना में प्रयुक्त ट्रक ड्राइवर बच्ची के घर जाते हुए और वापस आते हुए दिखाई दिया।

इन फुटेज की पहचान बच्ची के पिता से कराई तो उन्होंने बताया कि यह इस ट्रक का ड्राइवर दिनेश डाबर है। पुलिस ने इसे हिरासत में लेकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके साथ ही डीएनए जांच करवाई गई तो उसके द्वारा यह अपराध किया जाना साबित हुआ और उसने स्वीकार भी किया। इस पर पुलिस ने उसके खिलाफ अपहरण, पाक्सो, जान से मारने का प्रयास सहित गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। बाद में पुलिस ने बालिका के शरीर में मिले डीएनए की जांच की तो आरोपित से डीएनए मैच हुआ। पुलिस ने मेडिकल व वैज्ञानिक साक्ष्यों, विशेषकर डीएनए रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी।

शुक्रवार को अपर सत्र न्या्याधीश (विशेष न्यायालय पॉक्सो अधिनियम) क्षिप्रा पटेल ने आरोपी को विभिन्न चार धाराओं में आजीवन कारावास से दंडित किया। जिन धाराओं में उसे चार बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है वे धारा 5एम/6 पॉक्सो एक्ट, 5-J (iii) /6 पॉक्सो एक्ट, 5(ईR/ 6 पॉक्सो एक्टा और धारा 307 है। इसके साथ ही भादंवि की धारा 366 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 42 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर और प्रीति अग्रवाल ने की।

खास बात यह कि इस केस को कोर्ट ने गंभीर एवं सनसनीखेज प्रकरणों की श्रेणी में लिया। इसमें अभियोजन की ओर से कुल 31 गवाह करवाए गए। इसके अलावा परिस्थितजंय साक्ष्य भी काफी मजबूत रहे जिससे आरोपी को चौहरा आजीवन कारावास हुआ। कोर्ट ने बालिका को हुई मानसिक और शारीरिक क्षति की पूर्ति के लिए उसे 3 लाख रुपये पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत देने की अनुशंसा भी की है। कोर्ट ने इस मामले में दोषी को कम सजा देने को सही नहीं माना। कोर्ट ने आदेश में टिप्पणी की है कि उसने 2 वर्षीय मासूम को घर से उठाकर उसके साथ जघन्य कृत्य किया तथा उसे गंभीर चोटें पहुंचाईं, जो उसकी कुंठित आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है। वर्तमान परिस्थिति में महिलाएं घर से बाहर ही नहीं, बल्कि घर के अंदर भी असुरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में न्यूनतम दंड देना न्यायोचित नहीं है।

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