March 10, 2026

सुकमा में एम्बुलेंस के अभाव में युवक की मौतशव खाट पर लेकर घर पहुंचे परिजन

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सुकमा । सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में एक दर्दनाक घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के निवासी 40 वर्षीय युवकबारसे रामेश्वरमकी तबीयत बिगड़ने के बाद एम्बुलेंस का इंतजार करते-करते उसकी मौत हो गई। सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि न सिर्फ युवक की मौत के समयबल्कि बाद में शव को ले जाने के लिए भी परिजनों को एम्बुलेंस नहीं मिली। परिणामस्वरूपपरिजनों को शव को खाट पर लेकर घर जाना पड़ा। इस घटना ने न केवल जगरगुंडा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर कियाबल्कि पूरे सुकमा जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को भी सामने ला दिया है।

क्या है पूरा मामला

मृतक युवक बारसे रामेश्वरमजगरगुंडा इलाके का निवासी था। बताया जाता है कि युवक को हाथ-पैर में सूजन और पेट दर्द की शिकायत थी। पहले उसे जगरगुंडा के सरकारी अस्पताल में इलाज दिया गयालेकिन अचानक उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को कॉल कियालेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी कोई वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया।बार-बार एम्बुलेंस के लिए संपर्क करने के बावजूदजब कोई राहत नहीं मिलीतो परिजनों ने खुद ही अस्पताल पहुंचने की कोशिश की। लेकिन तब तक युवक की हालत और अधिक बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

यह घटना न केवल इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को उजागर करती हैबल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह से नदियोंपहाड़ियोंऔर अन्य दूरस्थ इलाकों में रह रहे लोगों के लिए मेडिकल सहायता तक पहुंच प्राप्त करना कितना कठिन हो सकता है। जगरगुंडा जैसे इलाकों मेंजहां तक पहुंचने के लिए भी बेहद कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता हैएम्बुलेंस का समय पर उपलब्ध न होना गंभीर समस्या बन चुकी है।मृतक के परिजनों ने एम्बुलेंस का इंतजार कियालेकिन जब कोई मदद नहीं मिलीतो शव को खाट पर लादकर घर ले जाना पड़ा। यह घटना न केवल सुकमा जिले के चिकित्सा प्रशासन के लिए एक शर्मनाक स्थिति हैबल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की अत्यधिक कमी को भी दर्शाती हैजो गंभीर स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए बिल्कुल असमर्थ है।

समाजसेवी और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

स्थानीय समाजसेवियों और कुछ ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि सुकमा जिले में कई गांवों में एम्बुलेंस की कमी लंबे समय से बनी हुई हैऔर प्रशासन इसे नजरअंदाज करता आ रहा है। जब भी किसी को मेडिकल सहायता की जरूरत होती हैतो इन गांवों में लोग अक्सर चिकित्सा सेवा की अनुपलब्धता से जूझते हैं।कई बार एम्बुलेंस को बुलाने पर वह समय पर नहीं पहुंच पातींजिससे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस घटना के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सुकमा प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देगा या यह मुद्दा ऐसे ही उपेक्षित रहेगा।

आगे की राह और सुधार की आवश्यकता

यह घटना सुकमा और अन्य ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति में सुधार की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट करती है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर गांव में एम्बुलेंस की उपलब्धता होऔर मेडिकल सहायता समय पर मिले। इसके अलावाएम्बुलेंस कर्मचारियों और चिकित्सा उपकरणों का उचित प्रबंध भी किया जाएताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

साथ हीग्रामीण इलाकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाएं और सुविधाएं बनाई जाएं ताकि वहां रहने वाले लोग भी बेसिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकें। सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में हुई यह घटना न केवल इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर करती हैबल्कि यह पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता को भी दिखाती है। जब तक प्रशासन और सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठातीतब तक ऐसे हादसे होते रहेंगेजो न केवल जिंदगियां ले सकते हैंबल्कि लोगों के विश्वास को भी तोड़ सकते हैं।

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