October 2, 2026

चुनाव आते ही काम के लिए जागे ‘नेताजी’!: 9-11 घंटे बिजली कटौती और कटते पेड़, कालाढूंगी की जनता में भारी आक्रोश

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Uttarakhand - Kaladhungi political news
  • जनता ने पूछा- 5 साल से कहां थे नेताजी?

कालाढूंगी। आगामी चुनावों की आहट सुनते ही कालाढूंगी क्षेत्र में अचानक विकास कार्य दिखाने की होड़ मच गई है। पिछले पांच सालों से ठप पड़े कामों को चुनावी मौसम में आनन-फानन में पूरा करने की यह कसरत अब स्थानीय जनता के लिए भारी मुसीबत का सबब बन चुकी है। लगातार हो रही बिजली कटौती और विकास के नाम पर हो रहे पेड़ों के कटान से लोगों का गुस्सा चरम पर है।

चिलचिलाती गर्मी में 9 से 11 घंटे की बिजली कटौती
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सड़कों के चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के नाम पर रोजाना घंटों पेड़ काटे जा रहे हैं, जिसके चलते सुबह से शाम तक कई बार तो 9 से 11 घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रखी जा रही है। उसम भरी गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच घंटों बिजली गायब रहने से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। घरों में रखे इन्वर्टर जवाब दे चुके हैं। वर्क फ्रॉम होम (WFH) करने वाले पेशेवरों का काम ठप पड़ गया है, वहीं छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को बेहद दयनीय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

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मुख्य शहरी क्षेत्र में…
कालाढूंगी का वह हिस्सा जो सीधे तौर पर हल्द्वानी से टकराता है, जिसमें ऊंचापुल, आनंद विहार, कमलुआगांजा आदि क्षेत्रों में तो कभी कुछ कुछ क्षेत्रों में बिजली की कटौती पेड़ कटाई के नाम पर जारी है। जानकारों के अनुसार ये कटाई कुछ ठंडक होने या बारिश के आसपास जब मौसम ठंडा था तब भी की जा सकती थी, जिससे आमजन को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन जैसे ही चुनावों के लिए चंद महीने बचे क्षेत्र में अचानक लोगों को तरक्की दिखाने के लिए कार्य शुरु कर दिया गया ताकि वोट मिल सकें।

कूुछ जानकार तो यहां तक कहते हैं कि कुछ और देरी से होता तो शायद नेताजी की टाइम लाइन वोट के मामले में लेट हो जाती। ऐसे में चाहे जितनी भी गर्मी हो लाइट काटना ही सही लगा क्योंकि 4—5 माह बाद चुनाव के समय तक जनता इस परेशानी को भूल जाएगी और वोट का फायदा हो जाएगा। क्योंकि यदि ये काम चुनाव तक पूर्णता के आसपास नहीं आया तो जनता इस पर वोट देने की बजाया चोट दे सकती थी। वहीं ये काम कुछ पहले भी हो सकता था, लेकिन वह शायद उस समय इसलिए नहीं कराया गया, क्योंकि चुनावों के कुछ समय पहले तक ये कार्य यदि पूरा हो जाता तो जनता ये किया गया काम भी भूल जाती। शायद पिछले पांच सालों के दौरान ये काम जानबूझ कर चुनाव के समय करने का प्लान बनाया गया हो, ताकि चुनाव के समय जब जनता को ये नया काम दिखे तो वह वोट पर इन्हीं के नाम का ठप्पा लगाए। और ये भूल जाए कि पिछले 5 सालों में तो कुछ काम ही नहीं हुआ, उसे केवल यहीं काम दिखे।

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“5 साल से सोए थे नेताजी?”— जनता का तीखा सवाल
क्षेत्र की जनता इस संबंध में प्रश्न करने पर बातचीत के दौरान खुलकर सवाल उठा रही है कि जो काम पूरे कार्यकाल में नहीं हुए, उन्हें चुनाव मुहाने पर आते ही हड़बड़ी में क्यों कराया जा रहा है? यहां तक की कई जगहों पर यह आमजनता के लिए चर्चा का विषय भी बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का यहां तक कहना है कि नेताजी को लगता है कि आखिरी वक्त में काम का दिखावा करके वे जनता को गुमराह कर लेंगे और दोबारा वोट हासिल कर लेंगे, लेकिन इस बार जनता कुछ और ही मन बना चुकी है।

जस की तस: दशकों पुरानी बुनियादी समस्याएं
स्थानीय लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर भी है कि कालाढूंगी सीट बनने के समय से ही क्षेत्र की जो मूल समस्याएं थीं, वे आज तक हल नहीं हो सकीं। कई बार विधायक चुनने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का बुरा हाल है:
– सड़क और बिजली-पानी: सड़कों की बदहाली और अनियमित बिजली-पानी की समस्या से सालों से राहत नहीं मिली।
– सफाई और ड्रेनेज: क्षेत्र में गंदगी के अंबार हैं और सीवरेज/शौचालय मलबे के ड्रेनेज सिस्टम का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।
– स्वास्थ्य और शिक्षा: अच्छे अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों की भारी कमी है, जिसके लिए लोगों को दूर दराज जाना पड़ता है।
– बढ़ता नशा: युवाओं में पैर पसारते नशे के नेटवर्क पर भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

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इस बार बदलाव के मूड में मतदाता
जनता का स्पष्ट कहना है, “हम बार-बार इस उम्मीद में वोट देते रहे कि शायद इस बार काम होगा, लेकिन अब और नहीं।” लोगों का मानना है कि केवल चुनाव देखकर हड़बड़ी में काम कराने से बीते सालों की नाकामी नहीं छिप सकती। इस बार कालाढूंगी की जनता वोट की ताकत से जवाब देने के मूड में नजर आ रही है।

– “5 साल कहां सोए थे नेताजी?” चिलचिलाती गर्मी में बिजली कटौती पर भड़की कालाढूंगी की जनता –
> Kaladhungi Power Cut & Tree Cutting Issue Ahead of Uttarakhand Elections <

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