25 हजार स्थानों पर एक साथ वंदे मातरम्, मालवा में 1.52 लाख लोगों ने मिलकर रचा नया इतिहास
विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मालवा प्रांत के 522 सरस्वती शिशु मंदिरों को जोड़ा गया। आयोजकों के अनुसार इन स्कूलों में करीब 1 लाख 52 हजार 850 लोग सामूहिक गायन में शामिल हुए। उज्जैन शहर में मारुति गंज और ऋषिनगर स्थित सरस्वती स्कूलों में भी विशेष आयोजन किया गया। यहां विद्यार्थी शिक्षक अभिभावक और समाज के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे और निर्धारित समय पर सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे प्रतिभागियों के एकत्रीकरण के साथ हुई। इसके बाद ठीक 11 बजे देशभर के निर्धारित स्थानों पर एक साथ संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया गया। इस दौरान स्कूल परिसरों में देशभक्ति का वातावरण नजर आया। मालवा प्रांत के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरस्वती शिशु मंदिरों को इस आयोजन के माध्यम से एक सूत्र में जोड़ने की तैयारी पहले से की गई थी।
विद्या भारती मालवा प्रांत के प्रांत प्रचार प्रमुख सुदर्शन शिशुलकर के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। वहीं सरस्वती स्कूल के प्राचार्य भगवान सिंह ठाकुर ने बताया कि मध्य प्रदेश में ही 5 लाख से अधिक लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सामूहिक गायन तक सीमित नहीं था बल्कि राष्ट्रभाव मातृभूमि के प्रति श्रद्धा सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूत करना भी था।
इस आयोजन को लेकर रिकॉर्ड बनाने की दिशा में भी तैयारी की गई है। आयोजकों ने एक साथ सर्वाधिक विद्यार्थियों और जनसमुदाय द्वारा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से प्रतिभागियों की संख्या का सत्यापन किया जाएगा।
दोपहर तक अलग अलग स्थानों से प्रतिभागियों की संख्या जुटाने का काम किया जाना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामूहिक गायन ने रिकॉर्ड के निर्धारित मानकों को पूरा किया है या नहीं। फिलहाल मालवा के 522 सरस्वती स्कूलों में एक साथ हजारों लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। एक ही समय पर अलग अलग शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में गूंजे वंदे मातरम् के स्वर ने पूरे आयोजन को देशभक्ति और सांस्कृतिक एकता से जोड़ दिया।
