MP में UPI पेमेंट को लेकर बढ़ी हलचल, 2 हजार से ऊपर के भुगतान पर कई दुकानदारों ने किया इनकार, जानिए वजह
भोपाल और इंदौर में इस अभियान का असर बाजारों में देखने को मिला। भोपाल व्यापारी संगठन से जुड़े अनुपम अग्रवाल के मुताबिक शहर में करीब 80 प्रतिशत कारोबार UPI के जरिए होता है। नो UPI डे पर करीब 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित होने का दावा किया गया। ग्वालियर में CAT के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज चौरसिया के अनुसार शहर में रोज करीब 100 करोड़ रुपए का कारोबार UPI से होता है और विरोध के दौरान इसमें करीब 20 प्रतिशत का असर पड़ा। इंदौर में भी करीब 50 करोड़ रुपए के कारोबार पर असर पड़ने की बात सामने आई।
विरोध की वजह 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित UPI चार्ज को बताया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने की बात कही गई है। प्रति ट्रांजैक्शन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए रखे जाने का उल्लेख किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि इससे UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ सकती है और कम मार्जिन वाले कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश में UPI के इस्तेमाल का आकार भी काफी बड़ा है। अगस्त में प्रदेश में कुल 50.79 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए जिनका कुल मूल्य 63 हजार 628.33 करोड़ रुपए रहा। जुलाई में 49.6 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 66 हजार 107 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। अगस्त के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में हर दिन औसतन 1.64 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए और इनका औसत दैनिक कारोबार करीब 2 हजार 52 करोड़ रुपए रहा।
प्रस्तावित चार्ज को लेकर व्यापारियों की चिंता खासतौर पर 2 हजार रुपए से अधिक के भुगतान को लेकर है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक P2M भुगतान का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा 2 हजार रुपए से ज्यादा की राशि वाला है। इस आधार पर करीब 12 हजार 788 करोड़ रुपए का मासिक कारोबार संभावित MDR दायरे में आ सकता है। यानी रोजाना करीब 4.13 लाख ट्रांजैक्शन और करीब 412 करोड़ रुपए के कारोबार पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना बताई जा रही है।
नो UPI डे के दौरान भोपाल के सराफा बाजार में भी इसका असर दिखाई दिया। एक ग्राहक सोने की अंगूठी खरीदने पहुंचा लेकिन भुगतान 2 हजार रुपए से ज्यादा होने के कारण दुकानदार ने ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार नहीं किया। ग्राहक के पास पर्याप्त नकद नहीं था और उसे बिना खरीदारी किए लौटना पड़ा। हालांकि कई दुकानदारों ने 2 हजार रुपए से कम के ऑनलाइन भुगतान स्वीकार किए। मेडिकल दुकानों पर भी UPI भुगतान जारी रहा और कुछ दुकानदारों ने 2 हजार रुपए से अधिक के भुगतान भी स्वीकार किए।
व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी और शादी का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे समय में यदि डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ती है तो इसका असर व्यापारियों के खर्च पर पड़ सकता है। कुछ कारोबारी संगठनों का तर्क है कि व्यापारी अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन करने के बजाय इसे कारोबार की लागत में शामिल कर सकते हैं जिसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है।
हालांकि प्रस्तावित MDR व्यापारी पर लगाए जाने की व्यवस्था बताई गई है और ग्राहक से सीधे UPI शुल्क लेने का प्रावधान नहीं है। सरकार और NPCI की ओर से भी कहा गया है कि MDR का भार सीधे ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी। इसके बावजूद व्यापारी और ग्राहक दोनों इस व्यवस्था को लेकर अपने अपने सवाल उठा रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित चार्ज को लेकर आगे क्या फैसला होता है और व्यापारियों की मांगों पर किस तरह विचार किया जाता है।
