November 4, 2026

कछपुरा मालगोदाम से उड़ती धूल पर NGT की सख्ती, रेलवे को नोटिस, 8 जनवरी को फिर होगी सुनवाई

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जबलपुर । जबलपुर के कछपुरा रेलवे मालगोदाम में फैल रहे प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT ने सख्त रुख अपनाया है। मालगोदाम में खाद्यान्न की लोडिंग और अनलोडिंग की अनुमति होने के बावजूद सीमेंट कोयला खाद और आयरन ओर जैसी दूसरी सामग्री का कारोबार किए जाने का आरोप है। इससे आसपास की रिहायशी कॉलोनियों में रहने वाले हजारों लोगों को धूल और प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस मामले में नागरिक उपभोक्ता मंच की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पश्चिम मध्य रेलवे को नोटिस जारी किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को होगी।

एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मालगोदाम की मौजूदा स्थिति और वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI की जांच रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि मालगोदाम और उसके आसपास प्रदूषण का स्तर कितना है और इससे स्थानीय आबादी पर कितना असर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि कछपुरा मालगोदाम में होने वाली गतिविधियों से करीब 50 हजार लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। मालगोदाम से उड़ने वाली धूल आसपास के इलाकों तक पहुंचती है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

नागरिक उपभोक्ता मंच के याचिकाकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे के मुताबिक कछपुरा रेलवे साइडिंग के आसपास कई बड़ी रिहायशी कॉलोनियां हैं। यहां लंबे समय से लोडिंग और अनलोडिंग का काम चल रहा है। इससे कई किलोमीटर तक धूल फैलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर शिकायतों के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मंच ने एनजीटी का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता के अनुसार मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 5 अप्रैल 2023 को इस मालगोदाम में केवल खाद्यान्न की लोडिंग और अनलोडिंग के लिए कंसेंट आदेश जारी किया था। इसके बावजूद यहां सीमेंट खाद और आयरन ओर सहित अन्य सामग्री का कारोबार जारी रहने का आरोप लगाया गया है।

मामले में पहले भी एनजीटी की ओर से प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता प्रभात यादव के अनुसार 7 अप्रैल 2025 के आदेश में मालगोदाम में वाहनों के परिवहन और सामग्री के भंडारण को व्यवस्थित करने के साथ शेड के भीतर लोडिंग और अनलोडिंग कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित पानी का छिड़काव करने और स्प्रिंकलर लगाने जैसे उपाय भी बताए गए थे। मालगोदाम में हरित पट्टी विकसित करने और बाउंड्री बनाने के साथ शेड निर्माण पर भी जोर दिया गया था।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं कराया गया। इसी आधार पर 5 मई 2026 को अवमानना याचिका दायर की गई। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से करीब 200 पेज का जवाब पेश किया गया। याचिकाकर्ता पक्ष के मुताबिक जवाब में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े निर्देशों के पालन में कई कमियां सामने आई हैं। एनजीटी ने रेलवे को जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय दिया है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भी जांच रिपोर्ट मांगी है।

अब 8 जनवरी 2027 को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मालगोदाम की मौजूदा स्थिति और AQI रिपोर्ट पेश करनी होगी। स्थानीय रहवासियों को उम्मीद है कि एनजीटी की सख्ती के बाद मालगोदाम में ढके हुए शेड और वॉटर कैनन जैसी व्यवस्थाएं लागू होंगी। साथ ही डस्ट सेपरेशन और धूल नियंत्रण के दूसरे उपाय भी किए जाएंगे। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इस मामले में आगे सख्त कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

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