माधव टाइगर रिजर्व में शिकारियों का खतरा बढ़ा, एक साल से लापता बाघिन एमटी-1 का सुराग नहीं, 11 बाघों की सुरक्षा चुनौती
माधव टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़कर 11 हो चुका है। इनमें चार शावक भी शामिल हैं। वहीं, शिवपुरी के जंगलों में तेंदुओं की संख्या 95 से अधिक बताई गई है। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या क्षेत्र के लिए अहम है, लेकिन इतने बड़े कुनबे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रबंधन के लिए बड़ी जिम्मेदारी भी है। हाल ही में कूनो नेशनल पार्क क्षेत्र में 19 महीने के एक चीता शावक की गोली लगने से मौत की घटना के बाद माधव टाइगर रिजर्व में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कूनो की सीमा के नजदीक स्थित इस रिजर्व में बाघों और दूसरे वन्यजीवों को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
बाघिन एमटी-1 की गुमशुदगी इस चिंता को और गंभीर बनाती है। करीब एक साल से उसकी गतिविधियों का पता नहीं चल पाया है। न तो उसके कॉलर आईडी से कोई सिग्नल मिल रहा है और न ही पार्क प्रबंधन उसे अपने निगरानी तंत्र के जरिए ट्रेस कर पा रहा है। हालांकि, बाघिन के लापता होने की वजह को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। उसकी स्थिति का पता लगाने के लिए तलाश जारी है।
वन्यजीवों के शिकार से जुड़ी घटनाएं भी चिंता का कारण हैं। जुलाई में आगरा वन प्रबंधन टीम ने 10 तेंदुओं की खाल के साथ चार शिकारियों को पकड़ा था। इस मामले में पकड़े गए एक व्यक्ति भोगीराम आदिवासी का संबंध शिवपुरी से होने की बात सामने आई थी। हालांकि, शिवपुरी के वन विभाग के अधिकारियों ने जिले से किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया था। इस प्रकरण ने वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनकी खाल के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए थे।
वन विभाग ने माधव टाइगर रिजर्व में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने की तैयारी की है। पार्क प्रबंधन पैदल गश्त बढ़ाने के साथ जंगल में प्रवेश के प्रमुख रास्तों पर निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य बाहरी लोगों की आवाजाही की जानकारी समय पर हासिल करना है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। रिजर्व क्षेत्र में लगाए गए कैमरों के जरिए भी वन्यजीवों और जंगल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
बाघों की मौजूदगी केवल जंगल के अंदरूनी हिस्सों तक सीमित नहीं रहती। कई बार वे सड़क किनारे और पहाड़ी इलाकों में भी दिखाई देते हैं, जबकि तेंदुए आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था का महत्व बढ़ जाता है। शिकारियों द्वारा जाल बिछाने या विस्फोटक का इस्तेमाल किए जाने की आशंका भी वन विभाग के लिए चुनौती है।
माधव टाइगर रिजर्व के बाघों से जुड़े मानव-संघर्ष के मामले भी सामने आ चुके हैं। अप्रैल 2026 में शिवपुरी के ऐरावन गांव के पास बाघिन एमटी-6 के हमले में 50 वर्षीय आदिवासी सरवन की मौत हो गई थी। डोगरपुर गांव में भी बाघों के हमले से कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। इन घटनाओं के बीच वन्यजीवों की निगरानी और लोगों की सुरक्षा, दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
टाइगर रिजर्व के उप संचालक हरिओम के अनुसार, वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पैदल गश्त को और मजबूत किया जाएगा। विभाग की टीमें जंगल के अलग-अलग हिस्सों में तैनात हैं और निगरानी लगातार की जा रही है। अब चुनौती बाघिन एमटी-1 का पता लगाने के साथ बढ़ते वन्यजीव कुनबे को शिकारियों से सुरक्षित रखने की है।
