एशियन पेंट्स का मुनाफा 7.5% बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये, निवेशकों को मिलेगा 5.75 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड
एशियन पेंट्स का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 1,539 करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले दूसरी तिमाही में मुनाफा करीब 30 प्रतिशत घटकर 1,067.6 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि के बावजूद तिमाही-दर-तिमाही प्रदर्शन में दबाव दिखाई दिया। कंपनी के कारोबार पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ा।
कंपनी की बिक्री से होने वाली आय में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में एशियन पेंट्स का रेवेन्यू 9,954 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 8,514 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर राजस्व में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 10,521 करोड़ रुपये के मुकाबले दूसरी तिमाही का रेवेन्यू करीब पांच प्रतिशत कम रहा।
कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण लागत से जुड़ा दबाव बना रहा। भू-राजनीतिक तनावों के चलते आपूर्ति व्यवस्था में आई रुकावटों ने भी कच्चे माल की उपलब्धता को प्रभावित किया। कंपनी ने बताया कि इन परिस्थितियों का असर जुलाई से सितंबर के दौरान उसके कामकाज पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। लागत में बढ़ोतरी के बीच कारोबार की वृद्धि और मुनाफे के प्रदर्शन पर दबाव एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।
डिविडेंड की घोषणा इस तिमाही के नतीजों का एक प्रमुख हिस्सा है। एशियन पेंट्स ने एक रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 5.75 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देने का फैसला किया है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर 2026 तय की गई है। पात्र शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान 13 नवंबर 2026 को या उसके बाद किया जाएगा। इस घोषणा से उन निवेशकों को लाभ मिलेगा, जो निर्धारित रिकॉर्ड डेट के अनुसार डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।
घरेलू कारोबार में कंपनी के डेकोरेटिव पेंट्स खंड ने वृद्धि दर्ज की। दूसरी तिमाही में घरेलू डेकोरेटिव पेंट्स कारोबार का वॉल्यूम 6.4 प्रतिशत और वैल्यू 14.5 प्रतिशत बढ़ी। कुल घरेलू कोटिंग्स कारोबार में वैल्यू के आधार पर 16.4 प्रतिशत और वॉल्यूम के आधार पर 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस प्रदर्शन में इंडस्ट्रियल कोटिंग्स कारोबार का भी योगदान रहा, जहां वैल्यू के लिहाज से 31.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी बिक्री बढ़ी, लेकिन मुनाफे पर दबाव बना रहा। इस खंड से शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 846 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,095.6 करोड़ रुपये हो गई, जो 29.5 प्रतिशत की वृद्धि है। स्थिर मुद्रा के आधार पर राजस्व में 23.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय कारोबार का कर-पूर्व मुनाफा 31 प्रतिशत घटकर 52.7 करोड़ रुपये रह गया। इससे स्पष्ट है कि बिक्री में बढ़ोतरी के साथ लागत और लाभप्रदता कंपनी के प्रदर्शन के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।
