May 28, 2026

गोद ली बेटी ने उठाया आत्मघाती कदम, सुसाइड नोट ने बढ़ाई रहस्य की परतें

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नई दिल्ली। राजधानी भोपाल के पॉश इलाके चार इमली से बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। यहां आईपीएस अधिकारी संजीव कंचन और जज रेणुका कंचन की 17 वर्षीय बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में शोक का माहौल है। पुलिस फिलहाल मामले की हर एंगल से जांच कर रही है, लेकिन अब तक आत्महत्या की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी है।

जानकारी के मुताबिक छात्रा 11वीं कक्षा में पढ़ती थी और रातीबड़ थाना क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित स्कूल की छात्रा थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह हाल के दिनों में पढ़ाई को लेकर तनाव में थी। पुलिस को परिवार की ओर से यह जानकारी भी दी गई कि छात्रा के पास मोबाइल फोन मिला था, जबकि माता-पिता ने उसे मोबाइल नहीं दिलाया था।

छात्रा की मां रेणुका कंचन ने पुलिस को बताया कि मोबाइल मिलने के बाद बेटी से पूछताछ की गई थी और उसे समझाइश दी गई थी। माना जा रहा है कि इसी बात से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई। घटना के समय माता-पिता दोनों अपने-अपने दफ्तर में थे। रेणुका कंचन भोपाल गैस राहत न्यायालय में पदस्थ हैं, जबकि संजीव कंचन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं।

हबीबगंज थाना प्रभारी संजीव चौकसे के अनुसार छात्रा ने दसवीं कक्षा पास करने के बाद हाल ही में 11वीं में प्रवेश लिया था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। छात्रा के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है।

सुसाइड नोट में छात्रा ने लिखा, “मम्मी-पापा, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं, लेकिन मैं आपकी अच्छी बेटी नहीं बन सकी। आई एम सॉरी।” हालांकि उसने आत्महत्या के पीछे की वजह का कोई जिक्र नहीं किया। पुलिस ने नोट और मोबाइल फोन जब्त कर लिया है।

पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने पुष्टि की है कि छात्रा को दंपती ने महज तीन महीने की उम्र में विधिवत गोद लिया था। परिवार ने उसे बेहद प्यार और अच्छे माहौल में पाला था। ऐसे में यह घटना सभी को झकझोर देने वाली मानी जा रही है।

जांच एजेंसियां अब छात्रा के दोस्तों, सहपाठियों और करीबी लोगों से बातचीत कर रही हैं ताकि उसके व्यवहार में आए बदलाव या किसी मानसिक तनाव के बारे में जानकारी मिल सके। साइबर सेल की मदद से उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट्स और हालिया ऑनलाइन गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो पाएगी। परिवार भी गहरे सदमे में है, इसलिए विस्तृत बयान अभी दर्ज नहीं किए जा सके हैं।

यह घटना एक बार फिर किशोर मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई के दबाव और डिजिटल दुनिया के प्रभाव जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लेकर आई है।

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