पिको डी ओरिजाबा पर लहराएगा तिरंगा, ज्योति ने शुरू की ऐतिहासिक तैयारी
दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वत अभियानों में शामिल इस मिशन को लेकर पर्वतारोहण जगत में खास उत्साह है। बर्फ से ढके विशाल स्ट्रेटोवोल्केनो पिको डी ओरिजाबा पर चढ़ाई आसान नहीं मानी जाती। यहां जमा देने वाली ठंड, तेज हवाएं, ऑक्सीजन की कमी और खड़ी बर्फीली ढलानें पर्वतारोहियों की कठिन परीक्षा लेती हैं। ऐसे में ज्योति रात्रे का यह अभियान केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता और साहस की भी बड़ी कसौटी माना जा रहा है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि अब तक किसी भारतीय महिला पर्वतारोही ने इस शिखर पर तिरंगा नहीं फहराया है। अगर ज्योति रात्रे अपने मिशन में सफल होती हैं, तो वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बन सकती हैं। यह उपलब्धि भारतीय महिला पर्वतारोहण इतिहास में नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है।
ज्योति रात्रे इस मिशन को सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखतीं। उनका मानना है कि यह अभियान देशभर की महिलाओं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों और महिलाओं के लिए प्रेरणा का संदेश लेकर जाएगा। वे चाहती हैं कि महिलाएं अपनी क्षमताओं को पहचानें और हर चुनौती का सामना आत्मविश्वास के साथ करें।
प्रस्थान से पहले ज्योति रात्रे ने कहा कि पर्वतारोहण हमें सिखाता है कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी शिखर असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाएं यह समझें कि सीमाएं वही होती हैं, जिन्हें वे खुद तय करती हैं। अगर आत्मविश्वास और मेहनत हो, तो दुनिया की कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है।
55 वर्षीय ज्योति रात्रे इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय पर्वत अभियानों में सफलता हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट सहित कई प्रमुख शिखरों पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया है। उनकी उपलब्धियां न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय रही हैं।
अब उनका नया लक्ष्य पिको डी ओरिजाबा है, जिसे फतह करना किसी भी पर्वतारोही के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है। पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान तकनीकी रूप से बेहद कठिन है और यहां मौसम कुछ ही मिनटों में बदल जाता है। ऐसे में इस मिशन के लिए महीनों की तैयारी, फिटनेस और विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है।
ज्योति रात्रे का यह अभियान महिला सशक्तिकरण, साहस और आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश भी देता है। खेल और रोमांच की दुनिया में उनका यह कदम आने वाली पीढ़ी की लड़कियों के लिए नई प्रेरणा बन सकता है। अब पूरे देश की नजरें इस अभियान पर टिकी हैं और सभी को उम्मीद है कि भोपाल की यह बेटी मैक्सिको की ऊंचाइयों पर तिरंगा लहराकर एक नया इतिहास रचेगी।
