करोड़ों खर्च के बाद भी सीवर की समस्या बरकरार, हाईकोर्ट की सख्ती के बीच ईएनसी बोले- कई लोग जाएंगे जेल
जानकारी के मुताबिक शिवपुरी में झील संरक्षण परियोजना के तहत सीवर प्रोजेक्ट के लिए करीब 67 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। लेकिन करीब 13 साल के दौरान इस प्रोजेक्ट पर 111 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यानी स्वीकृत राशि से लगभग 44 करोड़ रुपए अधिक खर्च होने के बाद भी सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं। इसका सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ रहा है और सीवेज के नालों के जरिए सख्य सागर यानी चांदपाठा झील तक पहुंचने की समस्या बनी हुई है।
हाईकोर्ट ग्वालियर ने 27 जुलाई 2026 की सुनवाई के दौरान मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी स्थिति और अधिकारियों की जवाबदेही से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को रिपोर्ट तैयार करने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होनी है। इससे पहले 24 सितंबर को एसीएस की जगह ईएनसी प्रदीप एस मिश्रा शिवपुरी पहुंचे और पूर्वी हिस्से में सीवर लाइन तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान सीवर लाइन की स्थिति और प्लांट से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा गया। झांसी तिराहे के पास सीवर चैंबर खोलकर लाइन में फंसा मलबा निकालने का काम भी किया जा रहा था। ईएनसी ने कहा कि सीवर लाइन चोक होने के कारण प्रोजेक्ट चालू नहीं हो पाया है। उन्होंने साफ किया कि इसे पूरा कराकर चालू करना जरूरी है क्योंकि सरकार की बड़ी राशि इस प्रोजेक्ट पर खर्च हो चुकी है।
ईएनसी प्रदीप एस मिश्रा ने कहा कि जिस तरह हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान में लिया है उसमें जिसकी गलती होगी उस पर रिकवरी निकलेगी और कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी और निर्णय हाईकोर्ट के स्तर पर तय होगा। ईएनसी ने बताया कि वह अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एसीएस को सौंपेंगे जिसके आधार पर विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सीवर प्रोजेक्ट को पूरी तरह फंक्शनल करना होगा। सीवर लाइन की सफाई के साथ जरूरी चैंबर भी व्यवस्थित तरीके से बनाने होंगे। एसटीपी का संचालन ठीक तरीके से होना जरूरी है क्योंकि सीवेज के कारण पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद सीवर प्रोजेक्ट में हुई देरी और खर्च की जिम्मेदारी को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
