आदिवासी बच्चों की मौत के बीच बालाघाट पहुंचे राहुल गांधी जगला में पीड़ित परिवारों से मुलाकात पर सबकी नजर
बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य व्यवस्था और पोषण से जुड़े सवालों के बीच सामने आया है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में बीमारी से 32 बच्चों की मौत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। वहीं कांग्रेस की ओर से इससे अधिक मौतों का दावा किया गया है। बैहर विधायक संजय उइके ने 43 बच्चों की मौत की बात कही है। ऐसे में सरकारी आंकड़े और विपक्ष की ओर से बताए जा रहे आंकड़ों में अंतर भी इस पूरे मामले का अहम पहलू बन गया है। इन अलग अलग आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि को लेकर स्थिति को अलग से देखना जरूरी है।
राहुल गांधी के दौरे का मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवारों से सीधे मुलाकात करना और उनकी स्थिति को समझना बताया गया है। वे जगला गांव में उन परिवारों से मिलेंगे जिन्होंने बीमारी के दौरान अपने बच्चों को खोया है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की मौत के पीछे एक ही कारण सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य जांच में मलेरिया खसरा कुपोषण एनीमिया डिहाइड्रेशन और सांस से जुड़ी परेशानियों जैसे कई स्वास्थ्य कारकों की जानकारी सामने आई है। इसलिए पूरे मामले को किसी एक बीमारी से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
इस मामले में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच और दूरदराज के आदिवासी इलाकों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार जैसे कदमों की जानकारी दी गई है। सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात भी सामने आई है। वहीं कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।
बालाघाट का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी का हिस्सा काफी बड़ा है। 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की कुल आबादी में अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत थी। विधानसभा की 230 सीटों में 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा कई सामान्य सीटों पर भी आदिवासी मतदाताओं की संख्या चुनावी समीकरणों को प्रभावित करती है। लोकसभा में मध्य प्रदेश की 29 सीटों में से 6 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2018 में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 47 सीटों में कांग्रेस ने 30 सीटें जीती थीं जबकि बीजेपी को 16 सीटें मिली थीं। 2023 के चुनाव में बीजेपी ने 24 एसटी आरक्षित सीटें जीतीं जबकि कांग्रेस को 22 और भारत आदिवासी पार्टी को एक सीट मिली। ये आंकड़े बताते हैं कि आदिवासी क्षेत्रों का राजनीतिक महत्व लगातार बना हुआ है।
राहुल गांधी का बालाघाट दौरा ऐसे समय हो रहा है जब बच्चों की मौत का मामला स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्था के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है। बीजेपी ने इस दौरे को राजनीतिक लाभ से जोड़कर सवाल उठाए हैं जबकि कांग्रेस प्रभावित परिवारों से मुलाकात को जमीनी स्थिति समझने का माध्यम बता रही है। अब राहुल गांधी की परिवारों से मुलाकात और उनके बाद सामने आने वाली प्रतिक्रियाओं पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी।
