July 22, 2026

अवैध संबंधों में बना हत्या का ब्लूप्रिंट, पत्नी और प्रेमी ने रची साजिश; 77 मिनट की कॉल डिटेल से खुला पूरे मर्डर का राज

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मध्य प्रदेश: के नरसिंहपुर जिले में युवक सपनेश पटेल की हत्या का मामला पुलिस जांच के दौरान एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के रूप में सामने आया। शुरुआत में युवक के अचानक लापता होने और कर्ज के कारण घर छोड़ने जैसी चर्चाओं के बीच जांच आगे बढ़ी, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और लगातार जुटाए गए प्रमाणों ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी। पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे पारिवारिक रिश्तों में आई दरार, कथित अवैध संबंध और पूर्व नियोजित षड्यंत्र प्रमुख कारण थे।

घटना 24 जनवरी 2021 की है, जब सपनेश पटेल शाम के समय एक फोन कॉल आने के बाद घर से यह कहकर निकला कि वह दोस्त के बुलावे पर पार्टी में जा रहा है। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिवार ने उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई, जबकि स्थानीय स्तर पर उसके कर्ज के कारण कहीं चले जाने की चर्चाएं भी होती रहीं। लगभग एक सप्ताह बाद उसका शव एक तालाब से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और परिजनों के बयान खंगाले। इसी क्रम में पता चला कि घटना से एक दिन पहले मृतक की पत्नी स्लेखा और रिश्तेदार सूर्यप्रकाश पटेल के बीच करीब 77 मिनट तक मोबाइल पर बातचीत हुई थी। घटना वाले दिन भी दोनों लगातार संपर्क में रहे। वहीं सूर्यप्रकाश के मोबाइल रिकॉर्ड की जांच में बृजेश यादव का नाम भी सामने आया, जिससे पुलिस का संदेह और गहरा गया।

पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को जानकारी मिली कि सूर्यप्रकाश और स्लेखा के बीच लंबे समय से कथित प्रेम संबंध थे। जांच में यह भी सामने आया कि सपनेश को इस संबंध की जानकारी हो चुकी थी और वह इसका विरोध करता था। आरोप है कि सूर्यप्रकाश ने उसे आर्थिक सहायता देकर चुप कराने का प्रयास भी किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद सपनेश को रास्ते से हटाने की योजना बनाई गई, जिसमें बृजेश यादव को भी शामिल किया गया।

पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन सपनेश को शराब पार्टी के बहाने बुलाया गया। तीनों ने एक ढाबे पर समय बिताया, जिसके बाद सुनसान स्थान पर मोबाइल चार्जिंग केबल से उसका गला घोंट दिया गया। हत्या के बाद शव को कार की डिक्की में रखकर पूरी रात इधर-उधर घुमाया गया ताकि ऐसा स्थान मिल सके, जहां सबूत आसानी से छिपाए जा सकें। बाद में शव को तालाब में फेंक दिया गया और उसके ऊपर पत्थर रख दिए गए। मृतक का मोबाइल फोन भी अलग स्थान पर फेंककर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।

जांच के दौरान टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों ने पुलिस की जांच को मजबूत आधार दिया। आरोपियों के बयानों में लगातार विरोधाभास सामने आने पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चार्जिंग केबल, वाहन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद कर लिए। अदालत में अभियोजन पक्ष ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, तकनीकी प्रमाण, गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायालय ने मामले को पूर्व नियोजित हत्या मानते हुए तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला आधुनिक तकनीकी जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सुलझाए गए प्रमुख आपराधिक मामलों में शामिल माना गया।

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