MP में थमे बादल तो 12 सितंबर से फिर बरसेगा मानसून: 11 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनेगा लो प्रेशर, प्रदेश में अब भी 6% बारिश कम
फिलहाल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से बादल छंट गए हैं और कई जिलों में तेज धूप निकल रही है। मंगलवार को भोपाल समेत कई शहरों में मौसम साफ रहा। हालांकि श्योपुर उज्जैन इंदौर धार खरगोन और बड़वानी जैसे इलाकों में कहीं हल्की बारिश तो कहीं बादल छाए रहे। नर्मदापुरम इटारसी और खरगोन में भी बारिश दर्ज की गई। इटारसी में तेज बारिश के बाद सड़कों पर पानी भर गया जबकि नर्मदापुरम में शाम के समय करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई। खरगोन के कसरावद और गोगावां इलाके में भी रुक रुककर बारिश का दौर चला।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अभी कोई बड़ा सिस्टम सक्रिय नहीं है इसलिए अगले कुछ दिनों में भारी बारिश की संभावना कम है। लेकिन 11 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र मौसम का रुख बदल सकता है। 12 सितंबर को छतरपुर पन्ना दमोह और कटनी में भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। इसके बाद सिस्टम की दिशा और ताकत के आधार पर दूसरे जिलों में भी बारिश का असर बढ़ सकता है। ऐसे में तीन दिन के ब्रेक के बाद प्रदेश में फिर मानसून की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है।
प्रदेश में अब तक कुल 31.2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है लेकिन इसके बावजूद सीजन की सामान्य बारिश के मुकाबले करीब 6 प्रतिशत पानी कम गिरा है। मध्य प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश करीब 37.3 इंच मानी जाती है। जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में बारिश ने कुछ हद तक इसकी भरपाई जरूर की लेकिन जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। यही वजह है कि अब तक प्रदेश का कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।
बारिश के आंकड़ों में प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच भी अंतर दिखाई दे रहा है। जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग के कई जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है। बालाघाट छिंदवाड़ा डिंडौरी दमोह जबलपुर कटनी नरसिंहपुर पांढुर्णा मंडला रीवा सागर सिवनी जैसे जिलों में भी सामान्य के मुकाबले कम बारिश दर्ज हुई है। दूसरी ओर अनूपपुर छतरपुर मैहर मऊगंज निवाड़ी पन्ना सतना शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ उमरिया भोपाल ग्वालियर खरगोन श्योपुर और शिवपुरी समेत 23 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।
प्रदेश के बड़े शहरों में सितंबर का मौसम भी खासा सक्रिय रहने वाला है। भोपाल में सितंबर की सामान्य बारिश करीब 7 इंच है और पिछले कई वर्षों में यहां इस महीने सामान्य से ज्यादा बारिश का ट्रेंड रहा है। इंदौर में सितंबर में करीब 30 इंच बारिश का रिकॉर्ड दर्ज है। ग्वालियर में सितंबर 1990 में करीब 25.5 इंच बारिश हुई थी जो अब तक का बड़ा रिकॉर्ड है। जबलपुर में भी सितंबर में भारी बारिश का इतिहास रहा है जबकि उज्जैन में कई बार सितंबर की बारिश ने पूरे मानसून के आंकड़े को तेजी से बढ़ाया है।
फिलहाल तीन दिनों की राहत के बीच लोगों को उमस और धूप का सामना करना पड़ सकता है लेकिन 11 सितंबर के बाद मौसम फिर करवट लेने की तैयारी में है। बंगाल की खाड़ी में बनने वाला नया सिस्टम कितना मजबूत होगा और उसका असर मध्य प्रदेश के कितने हिस्सों में पड़ेगा इस पर मौसम विभाग की नजर बनी हुई है। ऐसे में 12 सितंबर से प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर तेज होने की उम्मीद है।
