कल्पना की मौत पर नहीं थम रहा कांग्रेस का आक्रोश: अभय मिश्रा आज मंत्रालय के सामने देंगे मौन धरना, राजेंद्र शुक्ल के इस्तीफे की मांग
कल्पना मिश्रा की मौत 26 अगस्त की रात रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल में उपचार के दौरान हुई थी। वह प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती हुई थीं लेकिन इलाज के दौरान उनकी और उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। हालांकि मौत की वास्तविक वजह और किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही की अंतिम जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय होगी लेकिन घटना के बाद सामने आए वीडियो और परिजनों के आरोपों ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब कल्पना मिश्रा का मौत से कुछ घंटे पहले का वीडियो सामने आया। वीडियो में वह महिला वार्ड से बाहर निकलकर रोते हुए मदद मांगती नजर आई और इलाज को लेकर अपनी आशंका जाहिर करते हुए परिजनों से गुहार लगाती दिखाई दी। इस वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन पर सवाल और तेज हो गए। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने कल्पना की बिगड़ती हालत पर ध्यान देने और बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। मृतका के पिता ने जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। परिवार ने इलाज के दौरान कथित तौर पर 30 हजार रुपए की मांग किए जाने का भी आरोप लगाया है जिसकी जांच होना जरूरी है।
मामले में सरकार और चिकित्सा प्रशासन की ओर से शुरुआती कार्रवाई भी की गई है। दो डॉक्टरों और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को भी पद से हटाया गया जबकि श्याम शाह मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील कुमार अग्रवाल को रीवा से हटाकर सतना मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। उनकी जगह सतना मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. शशिधर प्रसाद गर्ग को रीवा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस तरह अधीक्षक सहित कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के बाद भी पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है।
सरकार ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति को इलाज से जुड़े दस्तावेजों चिकित्सकीय प्रोटोकॉल और संबंधित स्टाफ के बयान की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के निर्देश पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं। इसके बावजूद मृतका के पिता रामशरण मिश्रा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर और स्वतंत्र जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। परिवार ने मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी रीवा में धरने में शामिल होकर स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। कांग्रेस का आरोप है कि स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और जच्चा बच्चा की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने में देरी हो रही है।
अब कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा का भोपाल में मंत्रालय के सामने मौन धरना इस आंदोलन को नई राजनीतिक धार देने वाला माना जा रहा है। इससे पहले मंगलवार को युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जिसके बाद कांग्रेस ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर है क्योंकि पीड़ित परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और कांग्रेस इस मामले को लेकर सरकार पर अपना दबाव लगातार बढ़ा रही है।
