MP में परिवहन व्यवस्था को मिली नई रफ्तार, 351 बसों को हरी झंडी, गांवों तक पहुंचेगी ई-बस सेवा
मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम की बस सेवा वर्ष 2005 में बंद हो गई थी। इसके बाद प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में निजी बस संचालकों की भूमिका बढ़ती गई। अब सरकार ने दोबारा सरकारी बस सेवा को नए स्वरूप में शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंटरसिटी और इंट्रासिटी दोनों तरह की बसों को संचालित किया जाएगा। शुरुआत में प्रदेश के सात शहरों को इस सेवा से जोड़ा जा रहा है।
नई बसों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसों में CCTV कैमरे लगाए गए हैं जिनकी स्क्रीन ड्राइवर के सामने रहेगी। यात्रियों के लिए आरामदायक सीटों की व्यवस्था की गई है। इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ प्रदूषण कम करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया है।
सरकार की योजना केवल शहरों तक बस सेवा सीमित रखने की नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों को भी इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने प्रदेश की करीब 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इससे छोटे कस्बों और गांवों में रहने वाले लोगों को रोजगार शिक्षा इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए शहरों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने इस योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने की भी तैयारी की है। पहले साल करीब 1500 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद बसों की संख्या लगातार बढ़ाई जाएगी और वर्ष 2031 तक प्रदेश में करीब 15000 बसें संचालित करने की योजना है। यानी आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क काफी बड़ा करने की तैयारी है।
बस सेवा के संचालन के लिए PPP मॉडल अपनाया जाएगा। इसके तहत निजी ऑपरेटर भी परिवहन सेवा में भागीदारी करेंगे। ऑपरेटरों को यात्रियों से मिलने वाले राजस्व के अलावा विज्ञापन और कार्गो जैसी गतिविधियों से अतिरिक्त आय के अवसर भी मिलेंगे। इससे बस संचालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की कोशिश की जा रही है।
भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित प्रदेश के कई मंत्री और नेता कार्यक्रम में मौजूद रहे। बस सेवा शुरू होने को लेकर यात्रियों में भी उत्सुकता देखने को मिली। यात्रियों ने बसों में सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर संतोष जताया।
करीब दो दशक बाद सरकारी बस सेवा की वापसी से मध्यप्रदेश के सार्वजनिक परिवहन को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है। अब सबसे बड़ा फोकस इस बात पर रहेगा कि नई बस सेवा कितने शहरों और गांवों तक पहुंचती है और यात्रियों को नियमित सुरक्षित और सुविधाजनक सफर कितना उपलब्ध करा पाती है।
