MP में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, बिल पर अब 5.063% सरचार्ज, खपत बढ़ते ही बढ़ेगा अतिरिक्त भुगतान
FPPAS को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि यह पूरे बिजली बिल पर नहीं लगाया जाता। यह केवल ऊर्जा शुल्क पर लागू होता है। इसलिए किसी उपभोक्ता के बिल में दिखाई देने वाली कुल राशि में सरचार्ज की गणना सीधे 5.063 प्रतिशत के हिसाब से नहीं की जानी चाहिए। बिल में फिक्स्ड चार्ज मीटर से जुड़े शुल्क सब्सिडी और अन्य मद भी शामिल हो सकते हैं जिससे अंतिम भुगतान अलग हो सकता है।
बिजली मामलों के जानकार और रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर राजेंद्र अग्रवाल के अनुसार पिछली 4.59 प्रतिशत दर की तुलना में 100 यूनिट बिजली खपत पर करीब 2.46 रुपए अतिरिक्त भार पड़ेगा। इसी तरह 200 यूनिट पर करीब 4.12 रुपए 300 यूनिट पर लगभग 7.46 रुपए और 500 यूनिट पर करीब 14.31 रुपए अतिरिक्त राशि बन सकती है। यानी बिजली की खपत बढ़ने के साथ सरचार्ज के रूप में भुगतान भी बढ़ेगा।
इसे एक उदाहरण से समझें तो 300 यूनिट बिजली की खपत पर यदि ऊर्जा शुल्क 1576.50 रुपए है तो नई 5.063 प्रतिशत दर के हिसाब से FPPAS करीब 79.82 रुपए बनता है। वहीं 500 यूनिट की खपत पर यदि ऊर्जा शुल्क 3024.50 रुपए है तो सरचार्ज करीब 153.23 रुपए होगा। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ता को पूरे बिल की रकम पर 5.063 प्रतिशत भुगतान नहीं करना है।
बिजली बिल में अलग अलग खपत स्लैब के हिसाब से ऊर्जा शुल्क तय होता है। मौजूदा दरों के अनुसार शुरुआती 50 यूनिट के लिए अलग दर है जबकि 51 से 150 यूनिट 151 से 300 यूनिट और 300 यूनिट से अधिक खपत के लिए अलग ऊर्जा शुल्क निर्धारित है। इसी वजह से FPPAS का वास्तविक असर हर उपभोक्ता के लिए समान नहीं होगा। ऊर्जा शुल्क के आधार पर इसका प्रभाव करीब 24 से 37 पैसे प्रति यूनिट के बीच दिखाई दे सकता है।
अब सवाल यह है कि यह सरचार्ज बढ़ता क्यों है। बिजली बनाने और खरीदने की लागत हर महीने एक जैसी नहीं रहती। कोयले ईंधन और बाजार से बिजली खरीदने की कीमत में बदलाव होता रहता है। जब बिजली उत्पादन या खरीदी की लागत बढ़ती है तो उस अंतर की भरपाई के लिए FPPAS लगाया जाता है। इसलिए इसे बिजली की मूल दर में स्थायी बढ़ोतरी नहीं माना जाता बल्कि लागत के आधार पर होने वाला मासिक समायोजन माना जाता है।
उपभोक्ताओं को अपने बिल में ऊर्जा शुल्क और FPPAS की राशि अलग अलग देखकर वास्तविक अतिरिक्त भार समझना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक बाद में लागत का ट्रू अप भी हो सकता है। यानी मौजूदा सरचार्ज को बिजली की दर में स्थायी वृद्धि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। खपत जितनी अधिक होगी ऊर्जा शुल्क उतना अधिक होगा और उसी आधार पर FPPAS की राशि भी बढ़ सकती है।
