October 4, 2026

जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

0
21-1791113209
नई दिल्ली ।दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। क्राइम ब्रांच अब संबंधित महिला पत्रकारों के बयान दर्ज करेगी और पूरे मामले की जांच करेगी। आरोप उस समय से जुड़ा है, जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की जा रही थी। महिला पत्रकारों में से एक ने दावा किया है कि मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

एक महिला पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पकड़ा जा रहा था। इसी दौरान उसने ACP विवेक भगत पर उसके सीने पर हाथ मारने और धक्का देकर वहां से चले जाने का आरोप लगाया। महिला पत्रकार का दावा है कि घटना के समय वहां महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। आरोप सामने आने के बाद मामले को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, जो अब संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।

मामले को लेकर CJP की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। CJP ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार किया। संगठन के अनुसार, पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज करने से पहले CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। CJP ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित ACP को बचाने की कोशिश कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि जंतर-मंतर पर लगातार दो दिनों तक हुए प्रदर्शनों से जुड़ी है। 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचे थे। इनमें AISA समेत छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग शामिल थे। इस दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया। दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर कम से कम तीन FIR भी दर्ज की थीं।

इन प्रदर्शनों के पीछे चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद भी बताया गया है। SIR को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। इसके बाद SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए गए। आयोग ने कहा कि किसी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं। आयोग के अनुसार उसके सभी आदेशों को कानूनी आधार हासिल है और वे तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *