August 14, 2026

31 साल की नौकरी में 80 लाख वेतन और 2.53 करोड़ की संपत्ति! इंदौर नगर निगम के ARO के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा

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इंदौर  इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के ठिकानों पर लोकायुक्त ने शुक्रवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर लोकायुक्त की करीब 20 सदस्यीय टीम ने सुबह लगभग 6 बजे उनके घर और उनकी पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज हॉस्टल समेत दो ठिकानों पर एक साथ छापा मारा। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में अधिकारी की वैध आय और सामने आई संपत्ति के बीच बड़ा अंतर होने की बात कही गई है।

लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय नगर निगम में करीब 31 साल से नौकरी कर रहे हैं। उनके पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपये वेतन के रूप में मिलने का अनुमान लगाया गया है। दूसरी तरफ प्रारंभिक जांच में करीब 2.53 करोड़ रुपये की संपत्ति और खर्च से जुड़े आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन दोनों आंकड़ों के बीच करीब 1.73 करोड़ रुपये का अंतर है। प्रारंभिक गणना में इसे करीब 216.35 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति बताया गया है। हालांकि लोकायुक्त ने साफ किया है कि अभी यह आंकड़ा अंतिम नहीं है। दस्तावेजों और संपत्तियों के विस्तृत सत्यापन के बाद ही आय से अधिक संपत्ति की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त की टीम ने पांडेय की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की। टीम में डीएसपी सुनील तालान आनंद चौहान और निरीक्षक आशुतोष मिठास तथा सचिन पटेरिया समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे। जांच का मुख्य फोकस अधिकारी की आय के स्रोत और उनके परिवार के नाम खरीदी गई संपत्तियों के बीच तालमेल पर है।

प्रारंभिक जांच में पांडेय की पत्नी भावना पांडेय के नाम दो इमारतें सामने आने की बात कही गई है। पहली इमारत आनंद नगर एक्सटेंशन में बताई गई है। नवलखा-चितावद क्षेत्र में 40×50 फीट के प्लॉट पर इस भवन का निर्माण हुआ है। यह G+3 इमारत है और इसके निर्माण पर करीब 1.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। लोकायुक्त की टीम अब यह पता लगा रही है कि इस संपत्ति के निर्माण और खरीद के लिए रकम का स्रोत क्या था।

दूसरी इमारत गजाधर नगर चितावद के गुलमोहर का बगीचा इलाके में भावना पांडेय के नाम बताई गई है। यह G+2 बिल्डिंग है और इसमें हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। इसके निर्माण पर करीब 91.50 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है। दोनों संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच के साथ उनके निर्माण की लागत और मौजूदा मूल्य का भी सत्यापन किया जा रहा है।

लोकायुक्त की जांच में पांडेय के परिवार के नाम कई वाहन खरीदे जाने की जानकारी भी सामने आई है। पत्नी बेटे और बेटी के नाम चार पहिया और दोपहिया वाहन होने की बात कही गई है। इन वाहनों पर करीब 14 लाख रुपये खर्च होने का प्रारंभिक आकलन है। अब जांच एजेंसी यह देख रही है कि इन संपत्तियों और वाहनों की खरीद के लिए इस्तेमाल रकम का स्रोत क्या रहा।

अधिकारियों का कहना है कि छापे के दौरान मिले दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच पूरी होने के बाद ही अनुपातहीन संपत्ति का अंतिम आंकड़ा तय किया जाएगा। यानी फिलहाल सामने आए आंकड़ों को प्रारंभिक माना जा रहा है और जांच आगे बढ़ने के साथ संपत्ति का कुल मूल्य बढ़ या घट सकता है।

इंदौर की इस कार्रवाई के बीच जबलपुर लोकायुक्त की एक अन्य कार्रवाई भी चर्चा में है। सिवनी में पदस्थ बाबू सुभाष शर्मा के जबलपुर और सिवनी स्थित पांच ठिकानों पर छापे में करोड़ों रुपये की जमीन प्लॉट फार्महाउस और मकानों से जुड़े दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई थी। इससे मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति के मामलों में लगातार चल रही कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

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