शिवपुरी में 68 डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों का अटैचमेंट निरस्त, मूल अस्पतालों में लौटने के आदेश जारी
इस कार्रवाई में ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरों के अटैचमेंट भी समाप्त किए गए हैं। करैरा के बीएमओ डॉ. प्रदीप शर्मा जिला कार्यालय में जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी (डीटीओ) का काम देख रहे थे। वहीं, कोलारस के बीएमओ डॉ. सुनील खण्डोलिया और खनियाधाना के बीएमओ डॉ. रोहित भदकारिया भी जिला मुख्यालय पर जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। अब इन अधिकारियों को उनके मूल ब्लॉक में वापस जाकर बीएमओ के रूप में काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं रही। संविदा डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा गया है। इनमें 14 संविदा डॉक्टरों के साथ नर्सिंग ऑफिसर, फार्मासिस्ट, सहायक नर्स मिडवाइफ यानी एएनएम और डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। इन कर्मचारियों को शहरी कार्यालयों या अन्य स्थानों पर अटैच रखने के बजाय मूल कार्यस्थलों पर सेवाएं देने के लिए कहा गया है।
इसके अतिरिक्त नेत्र सहायकों, मल्टीपर्पज वर्करों और सहायक ग्रेड-2 के 33 कर्मचारियों का अटैचमेंट भी समाप्त किया गया है। ये कर्मचारी जिला अस्पताल, कलेक्टर कार्यालय और कोल्ड चेन से संबंधित कामों में लगाए गए थे। आदेश के अनुसार, उन्हें वहां से हटाकर उनके मूल उप स्वास्थ्य केंद्रों में वापस भेजा गया है। विभाग ने पिछोर, करैरा और नरवर क्षेत्रों में डॉक्टरों को दिए गए दोहरे प्रभार भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए हैं।
पोहरी ब्लॉक में भी प्रशासनिक बदलाव किया गया है। यहां संविदा चिकित्सक डॉ. द्वारिका प्रसाद वर्मा से ब्लॉक का प्रभार वापस ले लिया गया है। उनकी जगह नियमित चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत साहू को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव के जरिए ब्लॉक की स्वास्थ्य व्यवस्था में नियमित चिकित्सा अधिकारी की भूमिका बढ़ाई गई है।
सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषीश्वर के अनुसार, शासन की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को उनके गांव और कस्बों के आसपास ही बेहतर इलाज मिल सके। इसके लिए जरूरी है कि डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी अपनी निर्धारित पदस्थापना पर मौजूद रहकर काम करें। विभाग का कहना है कि इसी उद्देश्य से अटैचमेंट समाप्त करने का फैसला लिया गया है।
ग्रामीण अस्पतालों और उप स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों तथा कर्मचारियों की उपलब्धता स्थानीय मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि स्वीकृत पदों के अनुसार कर्मचारी अपने निर्धारित स्थानों पर सेवाएं देते हैं, तो मरीजों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय तक आने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, इस कार्रवाई का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित कर्मचारी मूल स्थानों पर नियमित रूप से काम करते हैं और वहां जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं या नहीं।
सीएमएचओ ने बताया कि पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट भोपाल भेजी जा रही है। अब विभाग के सामने आदेशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।
