May 25, 2026

हनीट्रैप-2 केस में चौंकाने वाला खुलासा: रेशू की राजनीतिक महत्वाकांक्षा सामने आई

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मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश का चर्चित हनीट्रैप-2 मामला लगातार नए खुलासों के साथ और गहराता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में सागर की रहने वाली रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी का नाम मुख्य सरगना के तौर पर सामने आ रहा है, जिसने साधारण जीवन से शुरुआत कर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की थी।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, रेशू ने सागर के मकरोनिया क्षेत्र से निकलकर पहले स्थानीय राजनीतिक माहौल में अपनी पकड़ बनाई। उसने भारतीय जनता पार्टी समेत विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी शुरू की और धीरे-धीरे खुद को एक उभरते हुए राजनीतिक चेहरे के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। यहां तक कि उसने विधानसभा चुनाव लड़ने की भी तैयारी की और सार्वजनिक रूप से दावेदारी तक जताई।

इसके साथ ही उसने शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम रखते हुए “ब्रह्मपुत्रा IAS एकेडमी” नाम से कोचिंग संस्थान शुरू किया। इस कोचिंग के प्रचार में उसने खुद को UPSC 2015 में चयनित बताकर अपनी छवि को मजबूत करने की कोशिश की। हालांकि बाद में यह दावा विवादों में आ गया और कोचिंग भी बंद हो गई।

जांच में सामने आया है कि रेशू सोशल मीडिया और राजनीतिक नेटवर्क का उपयोग कर नेताओं और प्रभावशाली लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाती थी। वह बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें साझा कर खुद को प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करती थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इनमें से कुछ तस्वीरें एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाई गई थीं या वास्तविक थीं।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब क्राइम ब्रांच को उसके मोबाइल और डिजिटल डिवाइस से 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो मिलने का दावा सामने आया। इन वीडियो में नेताओं, अफसरों, कारोबारियों और ठेकेदारों से जुड़े लोग बताए जा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इन वीडियो के जरिए करोड़ों रुपए की उगाही की गई और एक संगठित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क चलाया गया।

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क केवल रेशू तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें अन्य सहयोगियों की भूमिका भी हो सकती है। इससे पहले हनीट्रैप केस में नाम आ चुकी श्वेता विजय जैन से उसके संबंधों की भी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि दोनों के नेटवर्क आपस में जुड़े हुए थे और मिलकर प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाया जाता था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, रेशू ने अपनी राजनीतिक और सामाजिक पहुंच का इस्तेमाल कर रईस लोगों तक संपर्क बनाया और फिर कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग की रणनीति अपनाई। इसी नेटवर्क के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग और सौदेबाजी की बात भी सामने आई है।

इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा था और इसमें कितने लोग शामिल थे।

फिलहाल रेशू चौधरी की गिरफ्तारी के बाद जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और हर नए खुलासे के साथ मामला और जटिल होता जा रहा है।

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