आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग पहली हाइड्रोजन ट्रेन का सफल ट्रायल स्वच्छ रेल परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक कदम
रेल मंत्रालय के अनुसार इस ट्रेन में बिजली पैदा करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया से उत्पन्न ऊर्जा ट्रेन को चलाती है और उप उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। धुआं और कार्बन उत्सर्जन नहीं होने के कारण इसे वर्तमान समय की सबसे स्वच्छ रेल प्रौद्योगिकियों में शामिल माना जा रहा है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि भविष्य में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन को भी नई गति मिलेगी।
इस स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं जो कुल 2400 किलोवाट की शक्ति प्रदान करती हैं। ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों का भी उपयोग किया गया है जो ऊर्जा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाती हैं। इसके साथ लगभग 3000 किलोग्राम हाइड्रोजन संग्रहित करने की क्षमता विकसित की गई है। हाइड्रोजन को उच्च दबाव पर सुरक्षित रखा जाता है और नियंत्रित तरीके से ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है।
सुरक्षा के लिहाज से भी इस ट्रेन में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। गैस रिसाव अत्यधिक तापमान आग और धुएं का तुरंत पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां इसमें लगाई गई हैं। इसके अलावा ऑटोमैटिक शट ऑफ सिस्टम निरंतर वेंटिलेशन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप सभी आवश्यक परीक्षण भी पूरे किए गए हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य यात्रियों और परिचालन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
रेल मंत्रालय ने बताया कि जींद और सोनीपत के बीच सफल परीक्षण के बाद अब इस ट्रेन का ट्रायल दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा। यदि आगामी परीक्षण भी सफल रहते हैं तो भविष्य में इस तकनीक का विस्तार देश के अन्य रेल मार्गों पर भी किया जा सकता है। इससे डीजल पर निर्भरता घटेगी और रेलवे के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि इस स्वदेशी हाइड्रोजन तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार भारत के पास सुरक्षित हैं जिससे भविष्य में इस तकनीक का निर्यात भी किया जा सकेगा। उनके अनुसार हाइड्रोजन आने वाले समय का प्रमुख स्वच्छ ईंधन बनने जा रहा है और भारतीय रेलवे इस दिशा में लगातार नवाचार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेन केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में भी बड़ा कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी तकनीक को वैश्विक पहचान मिलेगी। भारत की यह उपलब्धि न केवल रेलवे के लिए बल्कि हरित ऊर्जा आधारित भविष्य की ओर बढ़ते देश के संकल्प का भी मजबूत प्रतीक बनकर उभरी है।
