भोपाल में ईद मिलादुन्नबी के महिला अखाड़े पर विवाद तेज, शहर मुफ्ती के बयान पर विरोध; कमेटी बोली- आत्मरक्षा के हुनर को डांस न कहें
दरअसल ईद मिलादुन्नबी के मौके पर निकले पारंपरिक जुलूस में महिला अखाड़े की प्रतिभागियों ने हाथों में तलवारें लेकर करतब दिखाए थे। सामने आई तस्वीरों में बुर्का पहने महिलाएं अखाड़े के प्रदर्शन में हिस्सा लेती दिखाई दे रही हैं। कुछ प्रतिभागियों के हाथों में घुमावदार तलवारें भी नजर आ रही हैं। आसपास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और कई लोग मोबाइल फोन से इस प्रदर्शन का वीडियो बनाते नजर आए। इसी प्रदर्शन को लेकर शहर मुफ्ती अबुल कलाम ने सवाल उठाते हुए इसे डांस बताया और जुलूस की धार्मिक गरिमा को लेकर आपत्ति जताई।
मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शहर मुफ्ती की इस टिप्पणी को गलत करार दिया है। जिला अध्यक्ष ओसाफ अली का कहना है कि प्रदर्शन को पूरी जानकारी लिए बिना डांस कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक जुलूस में शामिल बच्चियां और महिलाएं किसी मनोरंजन के लिए डांस नहीं कर रही थीं बल्कि अखाड़े की पारंपरिक कला और आत्मरक्षा से जुड़े हुनर का प्रदर्शन कर रही थीं। उनका कहना है कि ऐसे प्रदर्शन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और इसे प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
हाफिज अहमद शाहमीरी खुर्रम ने भी वीडियो जारी कर कहा कि शहर मुफ्ती को प्रदर्शन पर टिप्पणी करने से पहले पूरा संदर्भ समझना चाहिए था। उन्होंने दावा किया कि वीडियो को ध्यान से देखने पर साफ होता है कि बच्चियां डांस नहीं बल्कि अखाड़े के करतब और सेल्फ डिफेंस का प्रदर्शन कर रही थीं। उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए आत्मरक्षा के लिए हथियार चलाने की कला को केवल डांस के रूप में देखने पर सवाल उठाया।
विवाद के दौरान उन्होंने शहर मुफ्ती से यह भी अपील की कि यदि किसी सामाजिक या धार्मिक गतिविधि पर प्रतिक्रिया देनी है तो सभी मामलों में समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने यूसीसी और एनआरसी जैसे मुद्दों तथा मसाजिद कमेटी से जुड़े कुछ मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कुछ गतिविधियों पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी गई जबकि महिला अखाड़े के प्रदर्शन पर टिप्पणी की गई।
ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती के पद की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह पद समाज का मार्गदर्शन करने और लोगों को जोड़ने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक पद पर रहते हुए राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। उन्होंने काज़ियात कैंपस में पूर्व में हुए कुछ कार्यक्रमों का भी जिक्र किया और दावा किया कि वहां ढोल नगाड़े बजने तथा राजनीतिक कार्यक्रमों के वीडियो सामने आए थे। उनका सवाल है कि यदि उन गतिविधियों पर आपत्ति नहीं जताई गई तो महिला अखाड़े के पारंपरिक प्रदर्शन पर सवाल क्यों उठाया गया।
कमेटी ने साफ किया कि उसका उद्देश्य किसी धार्मिक व्यक्ति का अपमान करना नहीं है बल्कि धार्मिक पद की गरिमा और निष्पक्षता को लेकर जवाब मांगना है। ओसाफ अली ने शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को दी जानी चाहिए जो योग्य होने के साथ निष्पक्ष रूप से समाज का मार्गदर्शन कर सके। फिलहाल महिला अखाड़े के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद धार्मिक परंपरा आत्मरक्षा की कला और धार्मिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर बहस का विषय बन गया है।
