त्योहारी बाजार में सियासी शक्ति प्रदर्शन पर सवाल, 4 नवंबर की बीजेपी पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने जताई नाराजगी
पत्र में खास तौर पर न्यू मार्केट और जवाहर चौक जैसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। धनतेरस के अवसर पर इन बाजारों में बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। सोना चांदी और बर्तन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ रहती है। ऐसे में यदि बाजारों के आसपास पदयात्रा आयोजित होती है तो यातायात का दबाव बढ़ सकता है। कांग्रेस की ओर से आशंका जताई गई है कि इससे बाजारों तक पहुंचने वाले रास्तों पर जाम की स्थिति बन सकती है।
अभिनव बरोलिया माली ने अपने पत्र में कहा है कि धनतेरस और दीपावली का समय व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी अवसरों में शामिल होता है। दुकानदार पूरे साल इन त्योहारों की तैयारी करते हैं और इस दौरान होने वाली बिक्री से उन्हें बड़ी उम्मीद रहती है। ऐसे समय में यदि बाजारों की आवाजाही बाधित होती है तो ग्राहकों को परेशानी हो सकती है। कई लोग जाम के कारण बाजार पहुंचने का कार्यक्रम बदल सकते हैं या खरीदारी किए बिना लौट सकते हैं। इससे व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
पत्र के माध्यम से भाजपा नेतृत्व से आग्रह किया गया है कि राजनीतिक आयोजन के साथ आम नागरिकों की सुविधा और व्यापारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाए। कांग्रेस की मांग है कि पदयात्रा को किसी दूसरे स्थान पर आयोजित किया जाए या फिर उसका रूट ऐसा तय किया जाए जिससे न्यू मार्केट और आसपास के बाजारों की आवाजाही प्रभावित न हो। जरूरत पड़ने पर आयोजन को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद भोपाल में त्योहारी सीजन के दौरान राजनीतिक आयोजनों और यातायात प्रबंधन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। धनतेरस पर बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक भीड़ रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने की चुनौती रहेगी। खासकर न्यू मार्केट और जवाहर चौक जैसे इलाकों में पार्किंग और ट्रैफिक व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी।
पत्र में दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शनों के दौरान भाजपा और व्यापारी संगठनों की ओर से बाजारों में जाम और कारोबार प्रभावित होने के मुद्दे का भी उल्लेख किया गया है। अब भोपाल में भाजपा की पदयात्रा को लेकर कांग्रेस ने इसी तरह की चिंता जताई है। फिलहाल पदयात्रा का रूट बदले जाने या कार्यक्रम स्थगित होने को लेकर कोई निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में अब सबकी नजर भाजपा नेतृत्व के जवाब और प्रशासन की यातायात व्यवस्था पर रहेगी।
