भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल
ड्राफ्ट में भोपाल के संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर एक दर्जन से अधिक सड़कों का प्रस्ताव बताया गया है। इनमें 18 मीटर, 24 मीटर और 60 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल हैं। जिन क्षेत्रों में इन सड़कों का प्रस्ताव किया गया है, वहां बाघों की आवाजाही और प्रजनन गतिविधियां होने की बात कही गई है। इन वन क्षेत्रों को संरक्षित दर्जा भी प्राप्त है।
मामले में कालियाखेड़ा, करवा चौथ, मंडोर और मंदोरी सहित कुछ वन क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन इलाकों में बाघों की मौजूदगी और आवाजाही लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। साथ ही, इन क्षेत्रों की जमीन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। आरोप लगाया गया है कि ऐसी जमीनों पर प्रभावशाली लोगों के हित जुड़े हुए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि इससे पहले प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में भी जंगलों के बीच सड़क नेटवर्क विकसित करने के प्रावधान किए गए थे। उस समय दावे और आपत्तियां आमंत्रित किए जाने पर बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रावधानों का विरोध किया था। दावा है कि उस प्रक्रिया के दौरान 1500 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई थीं।
कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जंगलों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।
दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके लिए विभिन्न प्रावधानों और संबंधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के जंगलों को किसी भी स्थिति में बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, विकास के साथ वन संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
मास्टर प्लान 2047 का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भोपाल के विस्तार और बुनियादी ढांचे को दिशा देना है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्रों से प्रस्तावित सड़कें अब इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस का प्रमुख विषय बन गई हैं। एक ओर शहर के विकास और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र, बाघों के आवास और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।
अब इस ड्राफ्ट पर आने वाली आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि संरक्षित वन क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तावों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल मास्टर प्लान 2047 को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं और जंगलों के संरक्षण तथा शहरी विकास के बीच संतुलन का मुद्दा केंद्र में आ गया है।
