नवाबों की रुबात में VIP कोटे पर क्यों मचा घमासान, आम हाजियों के लिए बनी सुविधा के आवंटन पर उठे सवाल
भोपाल । भोपाल रियासत के नवाबों और बेगमों की ओर से हज यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से बनाई गई रुबात की सुविधा एक बार फिर चर्चा में है। मक्का में हाजियों के ठहरने के लिए उपलब्ध इस व्यवस्था के आवंटन को लेकर शनिवार को आयोजित कुर्रा यानी लॉटरी के दौरान विवाद हो गया। औकाफ-ए-शाही भोपाल की ओर से आयोजित प्रक्रिया में भोपाल सीहोर और रायसेन के कुल 1288 आवेदकों में से 200 हाजियों का चयन किया गया। इसके अलावा 25 आवेदकों को प्रतीक्षा सूची में रखा गया। लेकिन चयन के लिए निर्धारित 200 सीटों में से 10 सीटें वीआईपी कोटे के लिए आरक्षित रखने के मुद्दे पर हंगामा खड़ा हो गया। आम हाजियों और उनके परिजनों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सभी आवेदकों को समान अवसर देने की मांग की।
कुर्रा शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे कोहेफिजा स्थित सूफिया मस्जिद में आयोजित किया गया। प्रक्रिया शुरू होते ही वीआईपी कोटे को लेकर आपत्ति सामने आने लगी। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि रुबातें आम हाजियों को ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई थीं। इनका मकसद यात्रियों को मक्का में महंगे होटलों के खर्च से राहत देना था। ऐसे में जब सीमित सीटों के लिए बड़ी संख्या में लोग आवेदन कर रहे हैं तो कुछ सीटें विशेष श्रेणी के लिए आरक्षित रखने का आधार स्पष्ट होना चाहिए। लोगों ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सभी आवेदकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग उठाई।
रुबात की व्यवस्था भोपाल रियासत के नवाबों और बेगमों की उस पहल से जुड़ी है जिसके तहत भोपाल सीहोर और रायसेन के हाजियों को पवित्र शहरों में ठहरने की सुविधा देने का प्रयास किया गया था। हज यात्रा के दौरान आवास पर होने वाला खर्च यात्रियों के कुल बजट का बड़ा हिस्सा हो सकता है। ऐसे में रुबात में ठहरने की सुविधा मिलने से हाजियों को आर्थिक राहत मिलती है। इसी वजह से हर साल बड़ी संख्या में आवेदक इस सुविधा के लिए उम्मीद लगाए रहते हैं। इस बार भी 1288 लोगों के आवेदन आने से सीमित सीटों के मुकाबले मांग का अंतर साफ दिखाई दिया।
कुर्रा के आयोजन स्थल को लेकर भी चर्चा हुई। आमतौर पर यह प्रक्रिया मोती मस्जिद में आयोजित की जाती रही है लेकिन इस बार कार्यक्रम को कोहेफिजा स्थित सूफिया मस्जिद में रखा गया। औकाफ-ए-शाही की ओर से स्थान बदलने की वजह पार्किंग की समस्या बताई गई। हालांकि आयोजन स्थल में बदलाव के साथ ही वीआईपी कोटे को लेकर उठे सवालों ने कार्यक्रम के दौरान असंतोष को और बढ़ा दिया।
रुबात की सुविधा पिछले कुछ वर्षों से विवादों और कानूनी पेचीदगियों के कारण प्रभावित रही है। इसके चलते हाजियों को ठहरने के लिए अपने स्तर पर होटल की व्यवस्था करनी पड़ती है और यात्रा पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है। रुबातों के संचालन और आवंटन को लेकर स्थानीय मुस्लिम समाज तथा औकाफ-ए-शाही की भूमिका पर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में इस बार का विवाद केवल सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी सवाल सामने ला रहा है कि इस सुविधा का लाभ जरूरतमंद हाजियों तक किस तरह पहुंचाया जाए।
कार्यक्रम में शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी शहर मुफ्ती अबुल कलाम उत्तर भोपाल विधायक आतिफ अकील और औकाफ-ए-शाही की एग्जीक्यूटिव कम एडवाइजरी कमेटी के सदस्य आजम अली खान मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत कुरान की तिलावत से हुई और समापन शहर काजी की दुआ के साथ किया गया। चयन प्रक्रिया के लिए स्टेट हज कमेटी से प्राप्त सूची का इस्तेमाल किया गया।
अब विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि जब 1288 आवेदकों के मुकाबले केवल 200 हाजियों को सुविधा मिलनी है तो वीआईपी कोटे के लिए सीटें आरक्षित करने का आधार क्या है। आवंटन प्रक्रिया को लेकर उठी आपत्तियों के बीच पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना अहम हो गया है। आम हाजियों की मांग है कि रुबात जैसी जनहित की सुविधा में चयन के नियम स्पष्ट हों और आवंटन को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।
