बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम नहीं बदलेगा, कांग्रेस के सवाल पर उच्च शिक्षा मंत्री ने स्थिति की साफ की तस्वीर
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का मुद्दा उस समय चर्चा में आया था, जब विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इसका नाम बदलकर “मां वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव पारित किया था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार और कुलाधिपति के पास भेजा गया था। प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक स्तर पर इस विषय को लेकर विभिन्न दलों के बीच मतभेद भी देखने को मिले और इसे लेकर सार्वजनिक बहस तेज हो गई थी।
विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक आतिफ आरिफ अकील ने इस विषय पर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी। उन्होंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से पूछा कि क्या शासन ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव है तो नया नाम क्या होगा और लगभग तीन दशक से अधिक समय से स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलने के पीछे सरकार की मंशा क्या है।
विधायक ने अपने प्रश्न में यह मुद्दा भी उठाया कि डॉ. बरकतउल्ला भोपाली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण क्रांतिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या राज्य सरकार उन्हें स्वतंत्रता सेनानी के रूप में मान्यता देती है और यदि ऐसा है तो उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय का नाम बदलना किस आधार पर उचित माना जाएगा। इसके अलावा विश्वविद्यालय का नाम बदलने की वैधानिक प्रक्रिया और आवश्यक स्वीकृतियों के संबंध में भी जानकारी मांगी गई।
उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने अपने लिखित उत्तर में स्पष्ट कहा कि सरकार ने विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आगे कोई प्रश्न उत्पन्न नहीं होता। डॉ. बरकतउल्ला भोपाली से जुड़े प्रश्न पर मंत्री ने बताया कि संबंधित जानकारी एकत्रित की जा रही है। वहीं विश्वविद्यालय का नाम बदलने की प्रक्रिया के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विश्वविद्यालय का नाम परिवर्तित करने के लिए उसे संचालित करने वाले अधिनियम में संशोधन करना आवश्यक होता है, जो विधेयक के माध्यम से किया जाता है। अन्य प्रक्रियात्मक जानकारी निर्धारित अभिलेखों में उपलब्ध है।
सरकार के इस आधिकारिक जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वर्तमान समय में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कोई सरकारी योजना नहीं है। इससे लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगने की संभावना है। हालांकि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा पारित प्रस्ताव और उससे जुड़ी चर्चाओं को लेकर राजनीतिक विमर्श भविष्य में भी जारी रह सकता है। फिलहाल विधानसभा में सरकार के स्पष्ट बयान ने इस विषय पर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट कर दी है।
