बवासीर को मामूली समझकर न करें नजरअंदाज इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
पहली होती है आंतरिक बवासीर। यह मलाशय के अंदर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। शुरुआती स्थिति में इसमें आमतौर पर दर्द बहुत कम होता है या बिल्कुल नहीं होता। हालांकि मल त्याग के दौरान ताजा लाल खून दिखाई देना इसका प्रमुख लक्षण हो सकता है। जैसे जैसे समस्या बढ़ती है वैसे वैसे सूजी हुई नसें मलाशय से बाहर की ओर आने लग सकती हैं। आंतरिक बवासीर को गंभीरता के आधार पर चार ग्रेड में बांटा जाता है। शुरुआती ग्रेड में नसें अंदर रहती हैं जबकि आगे की स्थिति में वे बाहर निकल सकती हैं और कुछ मामलों में उन्हें हाथ से वापस अंदर करना पड़ सकता है।
दूसरी तरह की बवासीर बाहरी बवासीर होती है। यह गुदा के बाहर मौजूद नसों में सूजन के कारण होती है। इसमें दर्द खुजली और सूजन जैसी समस्या ज्यादा महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में सूजी हुई नस के भीतर खून का थक्का बन जाता है। इसे थ्रॉम्बोस्ड हेमोरॉयड कहा जाता है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज दर्द हो सकता है और गुदा के पास गांठ जैसी महसूस हो सकती है। यह स्थिति आमतौर पर जानलेवा नहीं होती लेकिन अचानक तेज दर्द या सूजन होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।
आमतौर पर बवासीर को जानलेवा बीमारी नहीं माना जाता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि लगातार होने वाले लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाए। खासकर लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में रक्तस्राव होने पर शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। इससे कमजोरी थकान और चक्कर जैसी परेशानियां हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में अत्यधिक रक्तस्राव चिंता का कारण बन सकता है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि मल के साथ खून आने का कारण हर बार बवासीर ही हो यह जरूरी नहीं है। गुदा में दरार यानी फिशर आंतों से जुड़ी दूसरी समस्याएं और कुछ गंभीर बीमारियां भी रक्तस्राव का कारण हो सकती हैं। इसलिए बार बार खून आने पर खुद से इसे बवासीर मानकर इलाज करना सही नहीं है।
अगर गुदा से लगातार या ज्यादा खून निकल रहा है और इसके साथ चक्कर कमजोरी बेहोशी जैसा महसूस होना तेज दर्द या काला मल आने जैसी समस्या हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई दिनों तक कब्ज दर्द खुजली या मल के साथ खून आने की समस्या बनी रहने पर भी जांच कराना जरूरी है।
बवासीर से बचाव के लिए कब्ज को नियंत्रित करना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। भोजन में फल सब्जियां साबुत अनाज और दालों जैसी फाइबर वाली चीजें शामिल करें। पर्याप्त पानी पिएं और मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने से बचें। टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा देर तक बैठने की आदत भी छोड़नी चाहिए। समय रहते ध्यान देने से बवासीर की समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
