September 16, 2026

अमेरिका में विदेशी छात्रों के OPT पर 1 लाख डॉलर फीस का प्रस्ताव, भारतीय छात्रों के लिए बढ़ सकती है नौकरी की लागत

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नई दिल्ली ।अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी का रास्ता महंगा होने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन ने Optional Practical Training यानी OPT से संबंधित करीब 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 96 लाख रुपये बताई गई है। प्रस्ताव को व्हाइट हाउस की मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे आगे नियम के रूप में लाया जा सकता है।

OPT अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सीमित अवधि तक काम करने की अनुमति देता है। इसका उद्देश्य छात्रों को उनके अध्ययन से जुड़े क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर देना है। आम तौर पर OPT के तहत छात्र 12 महीने तक काम कर सकते हैं। STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स से जुड़े पाठ्यक्रमों के छात्रों को इसके अलावा 24 महीने का अतिरिक्त समय मिल सकता है। इस तरह पात्र छात्रों को पढ़ाई के बाद कुल तीन साल तक काम करने का अवसर मिल सकता है।

प्रस्तावित बदलाव के तहत OPT से जुड़ी फीस 1 लाख डॉलर निर्धारित करने की बात सामने आई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इतनी बड़ी रकम का भुगतान कौन करेगा। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के प्रस्ताव में इस जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं होने की बात कही गई है।

फीस का भुगतान छात्र को करना होगा या उसे नौकरी देने वाली कंपनी को, यह फिलहाल तय नहीं है। कुछ कानूनी जानकारों के मुताबिक, OPT वाले विदेशी छात्र को नौकरी देने वाली कंपनी पर यह खर्च डाला जा सकता है। वहीं, इस बात को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं कि यदि भुगतान की जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों पर आती है तो किसी दूसरी कंपनी में काम करने वाले छात्र के लिए कॉलेज इतनी बड़ी राशि क्यों वहन करेगा।

प्रस्तावित फीस भारतीय छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद OPT के जरिए नौकरी करना वहां काम का अनुभव हासिल करने का एक प्रमुख रास्ता है। इसी अवधि में कुछ छात्रों को आगे चलकर नियोक्ता की मदद से H-1B वीजा के लिए अवसर मिल सकता है।

यदि प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की राशि छात्रों को स्वयं देनी पड़ती है, तो पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में नौकरी शुरू करना उनके लिए काफी महंगा हो सकता है। यदि इसका भुगतान कंपनियों या विश्वविद्यालयों को करना पड़ता है, तो इसका असर विदेशी छात्रों की भर्ती और रोजगार के अवसरों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

प्रस्ताव का असर केवल छात्रों तक सीमित रहने की बात भी सामने आई है। यदि विश्वविद्यालयों पर बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी आती है, तो कुछ संस्थान विदेशी छात्रों की संख्या कम करने पर विचार कर सकते हैं। इससे अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए उपलब्ध अध्ययन विकल्पों पर असर पड़ सकता है। इसी तरह कंपनियों को भी विदेशी छात्रों से मिलने वाले प्रशिक्षित प्रतिभाशाली कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले साल करीब 3 लाख विदेशी छात्रों के पास OPT के जरिए अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति थी। ऐसे में प्रस्तावित फीस का दायरा बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच सकता है। फिलहाल प्रस्ताव से जुड़े प्रमुख सवालों में यह शामिल है कि 1 लाख डॉलर की फीस का भुगतान कौन करेगा और अंतिम नियम लागू होने पर उसकी वास्तविक शर्तें क्या होंगी।

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