September 22, 2026

ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जा रहे F-35 के संवेदनशील पुर्जे हॉन्गकॉन्ग कैसे पहुंचे? चीन तक पहुंचने की आशंका से बढ़ी चिंता

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सिडनी।
पांचवीं पीढ़ी के अमेरिकी स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 लाइटनिंग II के बेहद संवेदनशील स्पेयर पार्ट्स की एक खेप ऑस्ट्रेलिया से मरम्मत के लिए अमेरिका भेजे जाने के दौरान रहस्यमय तरीके से हॉन्गकॉन्ग की ओर डायवर्ट हो गई। घटना सामने आने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन और अमेरिकी संसद कांग्रेस के राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हलकों में चिंता बढ़ गई है। पेंटागन ने पुष्टि की है कि इस शिपमेंट में शामिल F-35 के कुछ संवेदनशील पुर्जों का पता नहीं चल पाया है।

क्या गायब हुआ और क्यों अहम है?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गायब खेप में F-35 का कॉकपिट कैनोपी भी शामिल था। F-35 का कैनोपी सामान्य कांच या प्लास्टिक का कवर नहीं है। यह विशेष ऐक्रेलिक सामग्री से तैयार किया जाता है और इसकी सतह पर रडार-अब्जॉर्बेंट मटेरियल (RAM) की बेहद पतली पारदर्शी परत होती है।

यह तकनीक विमान की स्टील्थ क्षमता का हिस्सा है। इसका उद्देश्य रडार तरंगों के परावर्तन को कम करना है, जिससे विमान को दुश्मन के रडार पर पकड़ना कठिन हो जाता है।

रक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यदि ऐसा कोई वास्तविक पुर्जा किसी प्रतिद्वंद्वी देश के हाथ लग जाए तो उसकी तकनीकी जांच से संबंधित सामग्री और तकनीक के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है कि गायब पुर्जे चीन की सेना के हाथ लगे हैं।

ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजे जा रहे थे पुर्जे

अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, नॉर्वे, पोलैंड और नीदरलैंड समेत कई सहयोगी देश F-35 लड़ाकू विमानों का संचालन करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में F-35 के रखरखाव की सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन कैनोपी की विशेष मरम्मत सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे अमेरिका भेजा जा रहा था।

रिपोर्टों के मुताबिक, लॉकहीड मार्टिन के एक ठेकेदार या कमर्शियल शिपिंग प्रदाता के माध्यम से भेजे जा रहे कंटेनर को रास्ते में हॉन्गकॉन्ग की ओर डायवर्ट कर दिया गया। इसी कारण यह सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील रक्षा सामग्री वाली खेप को इस मार्ग पर कैसे भेजा गया और बाद में उसके कुछ पुर्जों का पता क्यों नहीं चल सका।

हॉन्गकॉन्ग पहुंचने से बढ़ी चिंता

हॉन्गकॉन्ग में चीन का प्रशासनिक और सुरक्षा नियंत्रण होने के कारण अमेरिकी पक्ष के लिए यह मामला संवेदनशील माना जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि हॉन्गकॉन्ग में पहुंचने के बाद खेप की सुरक्षा से समझौता हुआ हो सकता है। हालांकि, अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि किसी चीनी एजेंसी ने F-35 के पुर्जों को जब्त या स्कैन किया है।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस (JPO) ने कहा है कि वह गायब पुर्जों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें वापस हासिल करने के लिए अमेरिकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। मामले की जांच भी जारी है।

F-35 स्पेयर पार्ट्स की ट्रैकिंग पर पहले भी उठे सवाल

F-35 के स्पेयर पार्ट्स की निगरानी को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। 2023 की अमेरिकी सरकारी जवाबदेही कार्यालय (GAO) की रिपोर्ट में बताया गया था कि लॉकहीड मार्टिन और पेंटागन की व्यवस्था में खामियों के कारण पिछले पांच वर्षों में F-35 के करीब 8.5 करोड़ डॉलर मूल्य के 10 लाख से अधिक छोटे-बड़े स्पेयर पार्ट्स की ट्रैकिंग खो गई थी।

2025 में भारत में भी कई सप्ताह खड़ा रहा था F-35B

F-35 को लेकर इससे पहले भी संवेदनशीलता का मामला सामने आया था। 14 जून 2025 को ब्रिटेन का F-35B स्टील्थ लड़ाकू विमान केरल के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर आपात लैंडिंग के बाद करीब पांच सप्ताह तक वहां खड़ा रहा था। विमान 22 जुलाई 2025 तक भारत में रहा।

विमान अरब सागर में नियमित उड़ान पर था। खराब मौसम के कारण वह अपने मूल बेस और रॉयल नेवी के विमानवाहक पोत HMS Prince of Wales पर वापस नहीं लौट सका। ईंधन कम होने के कारण उसने तिरुवनंतपुरम को आपातकालीन रिकवरी एयरफील्ड के तौर पर चुना था।

विमान की संवेदनशील तकनीक को देखते हुए ब्रिटेन ने भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई हैंगर सुविधा और तकनीकी सहायता का इस्तेमाल नहीं किया था। उस समय F-35 की स्टील्थ कोटिंग और एडवांस्ड सेंसर फ्यूजन सिस्टम जैसी तकनीकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। विमान को हवाईअड्डे पर खुले में रखा गया था और उसकी सुरक्षा CISF के जिम्मे थी।

F-35 के पुर्जों की मौजूदा घटना ने एक बार फिर इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान की सप्लाई चेन, स्पेयर पार्ट्स की निगरानी और संवेदनशील तकनीकी सामग्री की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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