March 8, 2026

सरहद पार से आई सुखद खबर: लाहौर किले में 'लौह मंदिर' का जीर्णोद्धार संपन्न, अब लव की नगरी में गूंजेगी आस्था

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नई दिल्ली । भगवान श्री राम के भक्तों और भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था रखने वालों के लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित लाहौर किले के भीतर स्थित प्राचीन लौह मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सदियों पुराने इस मंदिर की चमक अब फिर से लौट आई है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने इसे अब आम जनता और श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिया है।

यह मंदिर केवल एक ढांचा नहीं है बल्कि यह सीधे तौर पर रामायण काल और भगवान श्री राम के कुल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार यह मंदिर भगवान राम के पुत्र लव को समर्पित है। जनश्रुतियों में यह गहरा विश्वास है कि वर्तमान लाहौर शहर की स्थापना माता सीता के ज्येष्ठ पुत्र लव ने ही की थी और उन्हीं के नाम पर इस शहर का नाम कालांतर में लाहौर पड़ा। यही कारण है कि इस मंदिर का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व सरहद के दोनों ओर रहने वाले लोगों के लिए बेहद खास है।

सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की कवायद वाल्ड सिटी लाहौर अथॉरिटी ने मंगलवार को आधिकारिक रूप से इस पुनरुद्धार की घोषणा की। अथॉरिटी की प्रवक्ता तानिया कुरैशी ने मीडिया को बताया कि लौह मंदिर के साथ-साथ सिख साम्राज्य की स्मृतियों को संजोए हम्माम और महाराजा रणजीत सिंह के प्रसिद्ध अठदारा पैविलियन का भी संरक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस पूरे अभियान का मूल उद्देश्य लाहौर किले की उस बहुआयामी विरासत को प्रदर्शित करना है, जहाँ मुगलकालीन मस्जिदें, ब्रिटिश काल के भवन और हिंदू-सिख मंदिर एक साथ खड़े होकर इतिहास की गवाही देते हैं। जीर्णोद्धार की प्रक्रिया में ऐतिहासिक मौलिकता को बनाए रखने के लिए आधुनिक और व्यापक वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया गया है।

सिख साम्राज्य का वैभव और शोध इस जीर्णोद्धार के पीछे एक लंबा शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों का गहरा अध्ययन शामिल है। साल 2025 में एक सिख शोधकर्ता ने लाहौर किले में सिख युग 1799-1849 के दौरान मौजूद लगभग 100 स्मारकों की पहचान की थी। हालांकि समय की मार के कारण इनमें से 30 स्मारक अब विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन शेष बचे हिस्सों को बचाने के लिए अब बड़े स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। इसी कड़ी में अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित सिख शोधकर्ता डॉ. तरुणजीत सिंह बुटालिया को एक विशेष टूर गाइडबुक ‘सिख साम्राज्य के दौरान लाहौर किला’ लिखने का दायित्व सौंपा गया है।

डॉ. बुटालिया ने इस प्रोजेक्ट पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि लाहौर किला सिख मानस और हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए भावनात्मक रूप से बहुत करीब है। यह किला आधी शताब्दी तक सिख सत्ता का केंद्र रहा और उनके पूर्वजों ने भी इसी दरबार में अपनी सेवाएं दी थीं। इस मंदिर का खुलना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि दक्षिण एशिया की साझा विरासत और अंतर-सांस्कृतिक सौहार्द को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा। अब दुनिया भर से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु लाहौर किले में लव की विरासत और सिख काल के वैभव को करीब से देख सकेंगे।

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