अमरीश पुरी की यादों के साथ वर्धन पुरी ने मनाई गणेश चतुर्थी, बोले- बप्पा हर साल परिवार को करीब लाते हैं
वर्धन ने बताया कि उनके परिवार में जब पहली बार घर पर बप्पा को लाने की परंपरा शुरू हुई थी, तब पूरा परिवार मिलकर गणपति के पसंदीदा मोदक अपने हाथों से तैयार करता था। इस परंपरा में उनके दादा-दादी, माता-पिता, बहन साची और परिवार के अन्य सदस्य भी शामिल होते थे। परिवार के सभी लोगों का साथ मिलकर त्योहार मनाना उनके बचपन की सबसे खास यादों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी परिवार की यह परंपरा उसी तरह जारी है। हर साल बप्पा के घर आने के साथ परिवार में खुशी और उत्सव का माहौल बनता है। वर्धन के मुताबिक, इस अवसर पर परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ मौजूद होना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।
वर्धन ने अपने परिवार के गणेश उत्सव मनाने के तरीके के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गणपति उत्सव के दौरान परिवार के लोग दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से एक जगह इकट्ठा होते हैं। वह मंदिर में स्थापित गणपति की उसी मूर्ति को अपने घर के बैठक वाले कमरे में लेकर आते हैं। इसके बाद दो दिनों तक बप्पा का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान घर में महाराष्ट्रीयन व्यंजन और अलग-अलग तरह के मोदक तैयार किए जाते हैं।
दो दिन के उत्सव के बाद परिवार के सभी सदस्यों की मौजूदगी में गणपति की मूर्ति को वापस मंदिर ले जाया जाता है। इसके बाद विसर्जन के लिए नारियल से बनी पर्यावरण के अनुकूल गणपति की मूर्ति लाई जाती है। वर्धन का कहना है कि बप्पा का उत्सव मनाने के साथ धरती और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है।
उनके मुताबिक, गणेश चतुर्थी की सबसे खास बात यह है कि हर साल यह त्योहार परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे के और करीब लाता है। उनके लिए यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि साथ समय बिताने, पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का अवसर भी है।
वर्धन पुरी दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी के पोते हैं। अमरीश पुरी ने हिंदी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ में निभाया उनका ‘मोगैम्बो’ का किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। 1987 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनका किरदार और उससे जुड़ा अंदाज हिंदी सिनेमा के यादगार खलनायकों में गिना जाता है।
अमरीश पुरी का 12 जनवरी 2005 को 72 वर्ष की उम्र में निधन हुआ था। उनके निधन के वर्षों बाद भी फिल्मों में उनके निभाए किरदार दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाए हुए हैं। वर्धन के लिए गणेश चतुर्थी उनके परिवार की परंपराओं के साथ-साथ दादा अमरीश पुरी से जुड़ी पुरानी यादों को संजोने का भी अवसर है।
