September 12, 2026

राजेंद्र कुमार की आंखों में आ गए थे आंसू, जब बेटी की विदाई में गूंजा नील कमल फिल्म का यह सदाबहार गाना

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नई दिल्ली।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में साठ का दशक संगीत और अभिनय के लिहाज से स्वर्णिम युग माना जाता है। इस दौर में जहां एक तरफ राजेश खन्ना और राजेंद्र कुमार जैसे दिग्गज अभिनेताओं ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए, वहीं दूसरी ओर संगीत की दुनिया में भी कई ऐसे अमर गीतों का निर्माण हुआ जो आज भी लोगों के दिलों को छू जाते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और यादगार किस्सा साठ के दशक के आखिरी सालों से जुड़ा हुआ है, जब फिल्म ‘नील कमल’ का एक प्रसिद्ध गाना अभी रिलीज भी नहीं हुआ था और उसने एक शादी समारोह में मौजूद सभी लोगों की आंखों को नम कर दिया था। इस गाने के बोल इतने मार्मिक थे कि हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता राजेंद्र कुमार खुद को रोने से रोक नहीं पाए थे और उन्होंने बेहद भावुक होकर संगीतकार से इस फिल्म और गाने के बारे में पूछताछ की थी।

यह पूरा घटनाक्रम फिल्म नील कमल के निर्माण के समय का है, जिसमें बलराज साहनी, राजकुमार और मनोज कुमार जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले थे। फिल्म के लिए एक विशेष विदाई गीत की आवश्यकता थी, जिसे संगीतकार रवि तैयार कर रहे थे। रवि ने इस खास गीत के लिए मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी से संपर्क किया, जिन्होंने अपनी कलम से बेहद दर्द भरे और दिल को छू लेने वाले बोल लिखे। इसके बाद इस गाने को अमर बनाने की जिम्मेदारी महान गायक मोहम्मद रफी को सौंपी गई, जिन्होंने ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ नामक इस विदाई गीत को अपनी जादुई आवाज से सजाया। गाना पूरी तरह से रिकॉर्ड हो चुका था, लेकिन फिल्म की रिलीज में अभी काफी समय बाकी था, जिसके कारण आम जनता और फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग इस शानदार रचना से पूरी तरह अनजान थे।

इसी दौरान फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर गीतकार राजेंद्र कृष्णन की बेटी की शादी का आयोजन हुआ, जिसमें बॉलीवुड के तमाम दिग्गज कलाकारों और संगीतकारों को आमंत्रित किया गया था। इस भव्य शादी समारोह में अभिनेता राजेंद्र कुमार भी शामिल हुए थे। शादी की रस्मों के बीच राजेंद्र कृष्णन ने संगीतकार रवि से अनुरोध किया कि वे अपनी सुरीली आवाज में महफिल में कोई गाना गाएं। रवि ने इस अनुरोध को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन उन्होंने एक अनूठी शर्त रखी कि वे यह गाना केवल बेटी की विदाई के समय ही गाएंगे। जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई और माहौल में उदासी छाने लगी, रवि ने हाथ में माइक संभाला और पूरी शिद्दत व गहरे भावों के साथ अपनी ही धुन पर तैयार किया हुआ अनरिलीज्ड गाना ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ गाना शुरू कर दिया।

रवि की मखमली और भावुक आवाज में इस गाने के बोल जैसे ही गूंजे, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। बेटी की विदाई का वह दृश्य इस गाने के प्रभाव से इतना गमगीन हो गया कि शादी में मौजूद राजेंद्र कुमार अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और फूट-फूट कर रोने लगे। गाना खत्म होने के बाद राजेंद्र कुमार तुरंत संगीतकार रवि के पास पहुंचे और अत्यंत भावुक होकर उनसे पूछा कि आखिर यह दिल को झकझोर देने वाला गाना किस फिल्म का है। चूंकि उस समय तक फिल्म नील कमल सिनेमाघरों में नहीं आई थी, इसलिए रवि ने उन्हें विस्तार से बताया कि यह उनकी आगामी फिल्म का एक विशेष विदाई गीत है, जिसे मोहम्मद रफी ने गाया है।

इस कालजयी गाने से जुड़ा एक और बेहद दिलचस्प और भावनात्मक पहलू गायक मोहम्मद रफी से भी जुड़ा हुआ है। जब रफी साहब स्टूडियो में इस गाने की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब वे खुद भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए थे। दरअसल, उन दिनों रफी साहब ने अपनी खुद की बेटी की सगाई की थी, और रिकॉर्डिंग के समय उनके जेहन में अपनी बेटी की विदाई का ख्याल आ गया था। इस वजह से गाते-गाते उनकी आवाज भारी हो गई और वे रो पड़े। संगीतकार रवि ने मोहम्मद रफी की उस भारी और दर्द भरी आवाज को तकनीकी रूप से सुधारने के बजाय वैसे ही रहने दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि एक पिता का यह वास्तविक दर्द गाने की आत्मा को और अधिक गहरा और जीवंत बना देगा, जो आज भी इस गाने में साफ महसूस होता है।

इस प्रकार, यह गाना न केवल फिल्म नील कमल की पहचान बना, बल्कि भारतीय शादियों में बेटी की विदाई का एक अनिवार्य हिस्सा भी बन गया। इतने दशक बीत जाने के बाद भी जब यह गाना कहीं बजता है, तो आज भी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। यह गीत इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब सच्चे भाव, बेहतरीन लेखन और बेहतरीन संगीत का मिलन होता है, तो ऐसी अमर कलाकृतियों का जन्म होता है जो पीढ़ियों तक इंसानी भावनाओं को झकझोरती रहती हैं।

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