विजय सलगांवकर का आखिरी खेल शुरू पुलिस के हाथ लगे पुख्ता सबूत Drishyam The Conclusion में क्या बच पाएगा परिवार
कहानी में विजय अब अपने परिवार के साथ सामान्य जिंदगी जीना चाहता है लेकिन पुराने मामले का पीछा उसका पीछा नहीं छोड़ता। मीरा और महेश देशमुख अपने बेटे सैम की मौत का सच सामने लाने के लिए विजय के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू करते हैं। इस बार मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच के एसपी राजवीर सिंह तोमर की एंट्री होती है। इसके साथ ही देश के चर्चित वकील इंद्रजीत शेट्टी भी केस का हिस्सा बनते हैं। पुलिस के हाथ ऐसे सबूत लगते हैं जो विजय और उसके परिवार के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं।
फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण यही है कि विजय इस बार किस तरह इन परिस्थितियों से बाहर निकलने की कोशिश करता है। पुलिस के पास पुराने मामले से जुड़े लोगों और फॉरेंसिक जांच से संबंधित महत्वपूर्ण कड़ियां मौजूद हैं। ऐसे में दर्शकों के सामने लगातार यही सवाल बना रहता है कि क्या विजय की बनाई पूरी कहानी इस बार भी पुलिस के सामने टिक पाएगी।
Drishyam The Conclusion की खास बात यह है कि इसे मलयालम दृश्यम 3 का सीधा रीमेक नहीं बताया गया है। फिल्म की कहानी को अलग तरीके से आगे बढ़ाया गया है। निर्देशक अभिषेक पाठक और उनकी राइटर्स टीम ने फ्रैंचाइजी के पुराने अंदाज को बरकरार रखते हुए नए ट्विस्ट जोड़ने की कोशिश की है। फिल्म का पहला हिस्सा कहानी और किरदारों के लिए माहौल तैयार करता है जबकि दूसरा हिस्सा मुख्य टकराव को आगे बढ़ाता है। कुछ मोड़ ऐसे हैं जो दर्शकों को चौंका सकते हैं।
हालांकि फिल्म की सबसे बड़ी कमी यह महसूस होती है कि इसका मूल ढांचा पिछली दृश्यम फिल्मों की याद दिलाता है। सस्पेंस और ट्विस्ट मौजूद हैं लेकिन कहानी में ऐसा बहुत कुछ नया नहीं है जो फ्रैंचाइजी के पुराने अनुभव से बिल्कुल अलग लगे। कुछ हिस्से ऐसे भी हैं जहां कहानी को आगे बढ़ाने के बजाय खींचा हुआ महसूस किया जा सकता है।
अभिनय की बात करें तो अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के किरदार में नजर आते हैं और उनकी गंभीर अदाकारी फिल्म का अहम हिस्सा है। श्रिया सरन और इशिता दत्ता ने भी अपने किरदारों को अच्छी तरह निभाया है। नई एंट्री के तौर पर जयदीप अहलावत और प्रकाश राज खास ध्यान खींचते हैं। प्रकाश राज का वकील इंद्रजीत शेट्टी वाला किरदार प्रभाव छोड़ता है। वहीं जयदीप अहलावत पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आते हैं।
तब्बू के किरदार को इस बार भी कहानी में बेटे के लिए न्याय की तलाश तक सीमित रखा गया है। उनके किरदार को पिछली फिल्मों की तुलना में ज्यादा विस्तार नहीं मिलता। कुल मिलाकर Drishyam The Conclusion में सस्पेंस और पारिवारिक तनाव का सिलसिला जारी रहता है। फिल्म फ्रैंचाइजी के पुराने प्रशंसकों के लिए विजय सलगांवकर की आखिरी बाजी देखने का मौका देती है हालांकि नएपन की तलाश करने वाले दर्शकों को कहानी कुछ जानी पहचानी लग सकती है।
