पति से तलाक के सालों बाद भी सिंदूर को लेकर सवालों में घिरीं रूपा गांगुली महाभारत की द्रौपदी ने साफ शब्दों में कही दिल की बात
सोनारपुर दक्षिण से विधायक रूपा गांगुली ने एक इंटरव्यू में सिंदूर लगाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि वह किस वजह से और किसके लिए सिंदूर लगाती हैं यह बताना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। उनका मानना है कि किसी महिला की व्यक्तिगत पसंद पर सवाल उठाकर उसे जवाब देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। रूपा ने अपने जवाब के जरिए यह स्पष्ट किया कि पहनावे और श्रृंगार से जुड़े फैसले किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी का हिस्सा हैं और दूसरे लोगों को उनके आधार पर किसी महिला के चरित्र या परिस्थितियों का आकलन नहीं करना चाहिए।
रूपा गांगुली की निजी जिंदगी भी पहले चर्चा में रही है। उन्होंने वर्ष 1992 में मैकेनिकल इंजीनियर ध्रुव मुखोपाध्याय से शादी की थी। हालांकि समय के साथ उनके वैवाहिक रिश्ते में मुश्किलें आईं और वर्ष 2007 में दोनों का तलाक हो गया। अभिनेत्री ने पहले अपने वैवाहिक जीवन के बारे में बात करते हुए बताया था कि परिवार को संभालने के लिए उन्होंने अपने अभिनय करियर के साथ भी कई समझौते किए थे। उन्होंने शूटिंग का समय इस तरह निर्धारित करने की कोशिश की थी कि परिवार को भी पर्याप्त समय दे सकें। इसके बावजूद उनका रिश्ता कायम नहीं रह पाया।
अभिनय की दुनिया में रूपा गांगुली को सबसे ज्यादा लोकप्रियता महाभारत में द्रौपदी की भूमिका से मिली। उनके अभिनय ने दर्शकों के बीच गहरी छाप छोड़ी और आज भी उन्हें इसी किरदार के लिए याद किया जाता है। टेलीविजन पर अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा। भाजपा से जुड़कर उन्होंने राजनीतिक जिम्मेदारियां संभालीं और पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। अभिनय और राजनीति दोनों क्षेत्रों में उनकी पहचान ने उन्हें सार्वजनिक जीवन का चर्चित चेहरा बनाया है।
रूपा गांगुली का मामला अकेला नहीं है जब किसी महिला के पहनावे या धार्मिक प्रतीकों को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए हों। इससे पहले अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद नुसरत जहां भी दुर्गा पूजा के दौरान सिंदूर खेला में शामिल होने को लेकर ऑनलाइन आलोचना का सामना कर चुकी हैं। पारंपरिक बंगाली साड़ी पहनने और सिंदूर लगाने के बाद उनकी धार्मिक पहचान को लेकर सवाल उठे थे। इस पर नुसरत ने कहा था कि त्योहार और परंपराएं व्यक्तिगत आस्था तथा पसंद से भी जुड़ी होती हैं और किसी को दूसरों की निजी पसंद पर अनावश्यक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
रूपा गांगुली के बयान ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि किसी महिला को अपनी निजी जिंदगी और श्रृंगार के फैसलों के लिए समाज के सामने सफाई क्यों देनी चाहिए। वैवाहिक स्थिति चाहे जो भी हो किसी महिला की व्यक्तिगत पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए। सिंदूर लगाने या न लगाने का फैसला उसका अपना हो सकता है और उसे इसके लिए दूसरों की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। यही संदेश रूपा गांगुली के जवाब से सामने आता है।
