Netflix की सस्पेंस फिल्म ‘गजब रात’ में भोपाल का जलवा, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से ऑपरेशन थिएटर तक शूट हुए अहम सीन
फिल्म में अस्पताल का माहौल कहानी के सस्पेंस और जांच-पड़ताल वाले हिस्सों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। अभिनेता मनोज बाजपेयी के किरदार को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और कॉरिडोर में तेजी से भागते हुए तथा मामले की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है। इन दृश्यों में अस्पताल का वास्तविक परिसर कहानी को प्रभावशाली पृष्ठभूमि देता है। फिल्म में इस्तेमाल की गई इन लोकेशंस के कारण भोपाल के दर्शकों के लिए पर्दे पर अपने शहर की जगहों को पहचानना भी खास अनुभव बन गया है।
मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चीफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजीनियर गौरव तिवारी के मुताबिक फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्य एमजीयू हॉस्पिटल और मानसरोवर मेडिकल कॉलेज परिसर में शूट किए गए हैं। शूटिंग के दौरान संस्थान के विभिन्न हिस्सों को फिल्म की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया गया। इससे परिसर को बड़े पर्दे पर देखने की उत्सुकता बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर भी फिल्म की शूटिंग को लेकर चर्चा हो रही है क्योंकि शहर की इमारतें और आसपास के क्षेत्र फिल्म के दृश्यों में नजर आते हैं।
फिल्म के लिए अस्पताल के कई अलग-अलग हिस्सों में कैमरा लगाया गया। इनमें ऑपरेशन थिएटर मरीजों के वार्ड अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस क्षेत्र फार्मेसी पैरामेडिकल लैब और अस्पताल का रिसेप्शन शामिल हैं। इसके अलावा लंबे कॉरिडोर और परिसर के गार्डन में भी दृश्य फिल्माए गए। इन जगहों को कहानी के हिसाब से इस्तेमाल कर फिल्म के माहौल को रहस्यमयी और वास्तविक बनाने की कोशिश की गई। अस्पताल जैसी लोकेशन क्राइम थ्रिलर में कहानी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ किरदारों की गतिविधियों को विश्वसनीय रूप देने में भी मदद करती है।
भोपाल में फिल्मों की शूटिंग होने से शहर की लोकेशंस को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिलता है। जब किसी फिल्म में स्थानीय संस्थानों और परिचित जगहों को दिखाया जाता है तो वहां रहने वाले लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ जाती है। गजब रात में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज और एमजीयू हॉस्पिटल की मौजूदगी इसी वजह से चर्चा में है। संस्थान से जुड़े लोगों के लिए भी यह अनुभव खास है कि उनके परिसर में फिल्माए गए दृश्य अब दर्शकों तक पहुंच रहे हैं।
मनोज बाजपेयी अपनी गंभीर अभिनय शैली और जटिल किरदारों के लिए पहचाने जाते हैं। क्राइम और इनवेस्टिगेशन पर आधारित इस फिल्म में अस्पताल के भीतर फिल्माए गए सस्पेंस से भरे दृश्य कहानी की रहस्यमय परतों को सामने लाते हैं। भोपाल की लोकेशंस ने फिल्म को वास्तविक परिवेश देने में योगदान दिया है। आधे से ज्यादा शूटिंग शहर के इन संस्थानों में होने की जानकारी के बाद फिल्म और भोपाल के बीच जुड़ाव भी चर्चा का विषय बन गया है। अब स्थानीय दर्शकों की दिलचस्पी इस बात में है कि फिल्म में उनके शहर की कौन-कौन सी जगहें दिखाई देती हैं और कहानी में इन लोकेशंस की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
