कुमार सानू के 69वें जन्मदिन पर याद आए उनके सदाबहार रोमांटिक गाने, आज भी कायम है आवाज का जादू
प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में उन्होंने 1984 में फिल्म ‘ये देश’ से शुरुआत की। उनके करियर को आगे बढ़ाने में गजल गायक जगजीत सिंह की भूमिका भी बताई जाती है। 1989 में जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी से कराई। इसी दौरान केदारनाथ भट्टाचार्य को कुमार सानू नाम अपनाने की सलाह दी गई।
इसके बाद वर्ष 1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म के संगीत ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई और कुमार सानू की आवाज घर-घर तक पहुंच गई। ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’, ‘अब तेरे बिन’, ‘नजर के सामने’ और ‘बस एक सनम चाहिए’ जैसे गीतों ने उनकी रोमांटिक गायकी को लोकप्रिय बनाया।
‘आशिकी’ के बाद 1990 के दशक में कुमार सानू ने कई चर्चित फिल्मों के लिए गीत गाए। ‘साजन’, ‘दीवाना’, ‘बाजीगर’, ‘परदेस’ और ‘1942: ए लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी लोकप्रियता को लगातार मजबूत किया।
उनके चर्चित गीतों में ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’ आज भी विशेष रूप से याद किया जाता है। यह गीत ‘आशिकी’ में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल पर फिल्माया गया था और फिल्म के लोकप्रिय संगीत का अहम हिस्सा रहा।
‘बाजीगर’ का ‘ये काली काली आंखें’ भी कुमार सानू के लोकप्रिय गीतों में शामिल है। शाहरुख खान और काजोल पर फिल्माए गए इस गाने में उनकी आवाज के साथ अनु मलिक की आवाज भी सुनाई दी थी।
फिल्म ‘दीवाना’ का ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें के नहीं’ भी 1990 के दशक में खूब लोकप्रिय हुआ। ऋषि कपूर और दिव्या भारती पर फिल्माए गए इस गीत को नदीम-श्रवण ने संगीत दिया था।
‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ का ‘चुरा के दिल मेरा’ कुमार सानू और अलका याग्निक की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था। अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी पर फिल्माया गया यह गीत भी लंबे समय तक लोकप्रिय रहा।
‘साजन’ का ‘मेरा दिल भी कितना पागल है’, ‘1942: ए लव स्टोरी’ का ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ और ‘कुछ कुछ होता है’ का ‘लड़की बड़ी अंजानी है’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में गिने जाते हैं।
‘हम दिल दे चुके सनम’ का ‘आंखों की गुस्ताखियां’ भी कुमार सानू की लोकप्रिय गायकी का हिस्सा रहा। कविता कृष्णमूर्ति के साथ उनकी आवाज ने इस गीत को खास पहचान दी।
कुमार सानू को संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। 1993 में एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड भी उनके करियर की चर्चित उपलब्धियों में शामिल है। 2015 की फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ के ‘दर्द करारा’ से उन्होंने नई पीढ़ी के श्रोताओं के बीच भी अपनी आवाज की पहचान बनाए रखी।
