अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया बनीं निम्मी एक फैसले ने दिलाई दुनिया भर में पहचान हॉलीवुड के ऑफर भी लौटाए
निम्मी का असली नाम नवाब बानो था। फिल्म निर्माता और निर्देशक राज कपूर ने उन्हें अपनी चर्चित फिल्म बरसात के जरिए फिल्मी दुनिया में मौका दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई यादगार फिल्मों में अपने अभिनय का जादू बिखेरा। उनकी सहज अदायगी और भावपूर्ण अभिनय ने उन्हें उस दौर की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया।
निम्मी के करियर का एक बेहद चर्चित किस्सा फिल्म आन से जुड़ा है। इस फिल्म का प्रीमियर लंदन के रियाल्टो थिएटर में आयोजित किया गया था जहां कई अंतरराष्ट्रीय मेहमान और हॉलीवुड से जुड़े कलाकार भी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम के दौरान हॉलीवुड अभिनेता एरल फ्लिन ने पश्चिमी परंपरा के अनुसार निम्मी का हाथ चूमने की कोशिश की। लेकिन भारतीय संस्कारों में विश्वास रखने वाली निम्मी ने विनम्रता से ऐसा करने से इनकार कर दिया। उनका यह व्यवहार वहां मौजूद लोगों के लिए चर्चा का विषय बन गया।
इस घटना के बाद विदेशी मीडिया ने निम्मी को अनकिस्ड गर्ल ऑफ इंडिया का नाम दिया। देखते ही देखते यह उपनाम पूरी दुनिया में उनकी पहचान बन गया। उस दौर में यह खबर अंतरराष्ट्रीय अखबारों की सुर्खियां बनी और निम्मी की लोकप्रियता भारत के बाहर भी तेजी से बढ़ गई।
लंदन प्रीमियर के बाद निम्मी के सामने हॉलीवुड से चार फिल्मों के प्रस्ताव आए। किसी भी भारतीय अभिनेत्री के लिए उस समय यह बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। हालांकि निम्मी ने बिना किसी हिचकिचाहट के इन सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। इसकी वजह केवल एक थी। वह अपनी व्यक्तिगत मर्यादाओं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहती थीं। उस समय हॉलीवुड फिल्मों में किसिंग और अंतरंग दृश्यों का होना सामान्य माना जाता था जबकि निम्मी ऐसे दृश्य करने के पक्ष में नहीं थीं।
निम्मी का मानना था कि सफलता तभी सार्थक है जब वह अपने सिद्धांतों और आत्मसम्मान के साथ मिले। उन्होंने कभी लोकप्रियता या बड़े अवसरों के लिए अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। यही कारण है कि आज भी उन्हें केवल एक सफल अभिनेत्री ही नहीं बल्कि मजबूत व्यक्तित्व वाली कलाकार के रूप में भी याद किया जाता है।
अपने फिल्मी सफर में निम्मी ने बरसात दीदार आन दाग कुंदन भाई भाई उड़नखटोला और बसंत बहार जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मों और अभिनय ने हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी। निम्मी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची पहचान केवल सफलता से नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों और मूल्यों पर अडिग रहने से भी बनती है। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका नाम सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है।
