भारतीय नस्ल की गायों के पालकों के लिए बड़ा मौका, इंदौर में पहले विजेता को 1 लाख और दूसरे को मिलेंगे 50 हजार रुपए
पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उप संचालक डॉ. दिनकर राव पाटील के मुताबिक जिले के रंगवासा दतोदा शिवनी और बनेड़िया गांवों में योजना के तहत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गांवों में पात्र पशुपालकों का पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद गायों के दुग्ध उत्पादन के आधार पर विजेताओं का चयन होगा। प्रतियोगिता में उन्हीं पशुपालकों को शामिल होने का अवसर मिलेगा जिनकी भारतीय नस्ल की उन्नत गाय प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देती है।
योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव में तीन पुरस्कार दिए जाएंगे। सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाली गाय के पालक को प्रथम पुरस्कार के रूप में एक लाख रुपए मिलेंगे। दूसरे स्थान पर आने वाले पशुपालक को 50 हजार रुपए और तीसरा स्थान हासिल करने वाले पालक को 25 हजार रुपए दिए जाएंगे। इस तरह प्रत्येक गांव में दुग्ध उत्पादन के आधार पर तीन विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार राशि के जरिए पशुपालकों को बेहतर पशुपालन पद्धतियां अपनाने और अपनी गायों की देखभाल पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
गोपाल कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना का प्रमुख उद्देश्य भारतीय नस्ल की उन्नत गायों के संरक्षण और पालन को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही दूध उत्पादन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले पशुपालकों को प्रोत्साहन देना भी योजना का अहम हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन कई परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में दूध उत्पादन बढ़ने से पशुपालकों की आमदनी में सुधार की संभावना बन सकती है। योजना के माध्यम से बेहतर नस्लों के पालन और दुग्ध उत्पादन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।
प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गाय का भारतीय उन्नत नस्ल का होना और प्रतिदिन कम से कम छह लीटर दूध देना जरूरी है। पात्र पशुपालकों को पंजीयन कराना होगा और गाय के दूध उत्पादन से संबंधित जानकारी देनी होगी। पंजीयन की प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों के बारे में संबंधित ग्राम या पशु चिकित्सा विभाग से जानकारी ली जा सकती है।
27 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस योजना के जरिए इंदौर जिले के चार गांवों में दुग्ध उत्पादन के आधार पर पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। अब यह देखना होगा कि इस पहल में कितने पशुपालक भाग लेते हैं और पुरस्कार योजना से भारतीय नस्ल की गायों के पालन तथा दूध उत्पादन को बढ़ावा देने में कितनी मदद मिलती है।
