August 7, 2026

पंजाब चुनाव 2027 से पहले क्या फिर साथ आएंगे बीजेपी और अकाली दल, सुखबीर बादल की पीएम मोदी से मुलाकात अहम

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नई दिल्ली । पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। संसद भवन में हुई इस बैठक के बाद पंजाब की राजनीति में बीजेपी और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की संभावनाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, दोनों दलों ने अभी तक किसी नए गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सुखबीर बादल ने मुलाकात के बाद बताया कि प्रधानमंत्री के साथ पंजाब की कानून व्यवस्था और राज्य की सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई। बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में इस मुलाकात को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और राज्य में बन रहे नए राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बीजेपी और अकाली दल का पंजाब में करीब ढाई दशक पुराना चुनावी गठबंधन रहा है। दोनों दल लंबे समय तक साथ चुनाव लड़ते रहे और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक ताकत के आधार पर एक-दूसरे को लाभ पहुंचाते रहे। अकाली दल का प्रभाव मुख्य रूप से ग्रामीण और किसान वर्ग में रहा, जबकि बीजेपी ने शहरी क्षेत्रों और हिंदू मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की।

हालांकि, वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के खिलाफ शुरू हुए किसान आंदोलन ने दोनों दलों के रिश्तों को बदल दिया। पंजाब में किसानों के व्यापक विरोध के बीच शिरोमणि अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। इसके साथ ही बीजेपी और अकाली दल की करीब 25 वर्ष पुरानी राजनीतिक साझेदारी टूट गई।

बाद में केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए, लेकिन दोनों दलों के बीच पुराना गठबंधन तुरंत बहाल नहीं हुआ। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी और अकाली दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। दोनों दलों को इसके बाद राज्य में अपने राजनीतिक आधार को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत महसूस हुई।

अकाली दल फिलहाल अपने पारंपरिक जनाधार को वापस मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बीजेपी भी पंजाब में अपने संगठन को विस्तार देने और स्वतंत्र राजनीतिक आधार तैयार करने में जुटी है। इसके बावजूद राज्य की जटिल सामाजिक और क्षेत्रीय राजनीति में दोनों दलों के पुराने तालमेल को पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। पुराने गठबंधन में बीजेपी सीमित सीटों पर चुनाव लड़ती थी, जबकि अकाली दल अधिक सीटों पर मैदान में उतरता था। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत बीजेपी ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीन सीटें जीती थीं। 2022 में दोनों दल अलग-अलग मैदान में उतरे और बीजेपी को भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

दोनों दलों के लिए गठबंधन की अपनी-अपनी राजनीतिक जरूरतें भी हैं। अकाली दल को ग्रामीण और पारंपरिक वोट आधार को मजबूत करने के साथ व्यापक राजनीतिक विकल्प खड़ा करना है। वहीं बीजेपी के सामने पंजाब में संगठनात्मक विस्तार के बावजूद अकेले दम पर सत्ता की दौड़ में मजबूत स्थिति बनाने की चुनौती है।

पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के खिलाफ बीजेपी, कांग्रेस और अकाली दल अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक अभियान चला रहे हैं। ऐसे में यदि बीजेपी और अकाली दल के बीच किसी तरह का समझौता होता है तो इसका सीधा असर चुनावी मुकाबले और सीटों के समीकरण पर पड़ सकता है।

फिलहाल सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को गठबंधन की औपचारिक शुरुआत नहीं कहा जा सकता। दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन चुनावी तैयारियों के बीच हुई इस बैठक ने इतना जरूर संकेत दिया है कि पंजाब में 2027 के चुनाव से पहले पुराने राजनीतिक रिश्तों और नए समीकरणों को लेकर संभावनाएं खुली हुई हैं।

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